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Punjab News: भाजपा विकास पर नहीं, धर्म और जाति के नाम पर चुनाव लड़ती है: हरपाल सिंह चीमा

पंजाब
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Punjab News: अमृतसर और जालंधर में हालिया धमाकों के बाद पंजाब की राजनीति फिर गरमा गई है। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए इसे केवल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि सियासी साजिश का हिस्सा बताया। उनका आरोप है कि चुनावों से पहले डर और अस्थिरता का माहौल बनाकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।

“विकास नहीं, विभाजन पर आधारित राजनीति”

चीमा ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कभी भी आर्थिक विकास, रोजगार या जनकल्याण के मुद्दों पर वोट नहीं मांगती, बल्कि धर्म और जातिगत विभाजन के सहारे चुनाव लड़ती है। उनके अनुसार, यह रणनीति देश के विभिन्न राज्यों में देखी गई है, जहां चुनावों से पहले सांप्रदायिक तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ाने की कोशिश की जाती है।

‘आप’ बनाम भाजपा: दो अलग राजनीतिक मॉडल

चीमा ने आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा की राजनीति के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में ‘आप’ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और मजबूत कानून व्यवस्था पर काम कर रही है।
इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति विभाजन, नफरत और सत्ता हासिल करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसे तरीकों पर आधारित है।

पंजाब की एकता पर भरोसा

चीमा ने जोर देकर कहा कि पंजाब की धरती पर नफरत के बीज कभी नहीं उगे हैं और आगे भी नहीं उगेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब हमेशा से भाईचारे, एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है, और यहां के लोग हर बार विभाजनकारी ताकतों को हराते आए हैं।

इतिहास की विरासत और बलिदान

अपने बयान में चीमा ने पंजाबियों के देश के लिए दिए गए योगदान को भी याद किया। आजादी की लड़ाई से लेकर 1962, 1965 और 1971 के युद्धों तक, पंजाब ने देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है। यह विरासत आज भी पंजाब के युवाओं में देशभक्ति और बलिदान की भावना को जीवित रखती है।

सरकार की सख्त चेतावनी

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी कीमत पर पंजाब की शांति और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि समाज विरोधी तत्वों और उन्हें समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भगवंत सिंह मान की अगुवाई में सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राज्य की एकता को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

जनता के सामने बड़ा सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजनीति का केंद्र क्या होना चाहिए—विकास और जनकल्याण या फिर विभाजन और डर?
पंजाब की जनता के सामने यह विकल्प स्पष्ट रूप से मौजूद है, और आने वाले समय में यह तय करेगा कि राज्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।