Punjab News: पंजाब पुलिस ने कम्युनिटी पुलिसिंग को एक नए स्तर पर ले जाते हुए ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ शुरू किया है, जो आज के डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच यह पहल उन युवाओं तक पहुंचने का प्रयास है, जो अनजाने में गैंगस्टर संस्कृति, हिंसा या गलत गतिविधियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
2,358 युवाओं की ऑनलाइन पहचान
इस कार्यक्रम के तहत अब तक 2,358 ऐसे युवाओं की पहचान की गई है, जो सोशल मीडिया के जरिए नकारात्मक प्रभावों की ओर बढ़ रहे थे। इनमें से 1,519 युवाओं की प्रोफाइल तैयार कर उन्हें राज्य स्तरीय ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ में शामिल किया गया है, ताकि उनकी निगरानी और मार्गदर्शन बेहतर तरीके से किया जा सके।
जागरूकता और काउंसलिंग से बदलाव
अब तक 1,490 युवाओं को जागरूक किया जा चुका है और 1,109 युवाओं ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया है। कुल मिलाकर 1,836 युवाओं को जिला स्तर पर काउंसलिंग दी गई है। यह दर्शाता है कि केवल सख्ती नहीं, बल्कि समझ और मार्गदर्शन के जरिए भी अपराध को रोका जा सकता है।
‘गैंगस्टरों ते वार’ के साथ दोहरी रणनीति
पंजाब पुलिस ‘गैंगस्टरों ते वार’ अभियान के तहत जहां एक ओर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं ‘युवा सांझ’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं को अपराध की राह पर जाने से पहले ही रोकने का प्रयास किया जा रहा है। यह दोहरी रणनीति राज्य में अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी मानी जा रही है।
नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी
इस पहल का नेतृत्व स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ कर रही हैं, जबकि डीजीपी गौरव यादव ने इसे संतुलित रणनीति बताया है। जिला स्तर पर ‘युवा सांझ’ समितियों में पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक, एनजीओ, रिटायर्ड अधिकारी और समाजसेवी भी शामिल हैं, जिससे यह कार्यक्रम अधिक प्रभावी बनता है।
मनोवैज्ञानिक सहायता और परिवार की भूमिका
कार्यक्रम में केवल पहचान ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग, काउंसलिंग और परिवार की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। जिन मामलों में गहन हस्तक्षेप की जरूरत होती है, उन्हें उप-मंडल स्तर के सामुदायिक केंद्रों में भेजा जाता है, ताकि लगातार देखभाल सुनिश्चित की जा सके।
पुनर्वास और रोजगार के अवसर
‘युवा सांझ कार्यक्रम’ केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के पुनर्वास पर भी जोर देता है। इसके तहत पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन के सहयोग से युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता भी दी जाती है, ताकि वे सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ सकें।
जमीनी स्तर पर असर
फाजिल्का के एसएसपी गुरमीत सिंह के अनुसार, इस पहल ने न केवल अपराध दर को कम करने में मदद की है, बल्कि युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से भी रोका है। उन्होंने इसे देश में अपनी तरह की एक अनोखी पहल बताया, जिसने युवाओं को अपनी सोच बदलने और सही दिशा में आगे बढ़ने का मंच दिया है।
रोकथाम ही सबसे बड़ा समाधान
‘युवा सांझ कार्यक्रम’ यह साबित करता है कि अपराध से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका केवल सजा देना नहीं, बल्कि समय रहते रोकथाम करना है। पंजाब पुलिस की यह पहल न केवल युवाओं को बचाने का काम कर रही है, बल्कि समाज को सुरक्षित और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का भी मजबूत प्रयास है।
