Piyush Pandey: मशहूर एड गुरु पीयूष पांडेय का गुरुवार को निधन हो गया।
Piyush Pandey: भारतीय विज्ञापन उद्योग के दिग्गज और मशहूर एड गुरु पीयूष पांडेय (Ad Guru Piyush Pandey) का गुरुवार को निधन हो गया। उन्होंने 70 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। चार दशकों से अधिक समय तक उन्होंने ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) के साथ काम किया और भारतीय विज्ञापन जगत (Indian Advertising Industry) को एक नई दिशा दी। साल 1982 में ओगिल्वी से जुड़ने वाले पीयूष पांडे ने 27 साल की उम्र में अंग्रेजी-प्रधान विज्ञापन उद्योग में कदम रखा और इसे पूरी तरह बदल दिया। पढ़िए पूरी खबर…

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‘कुछ खास है’ और ‘फेविकोल’ जैसे यादगार कैंपेन बनाए
पीयूष पांडेय (Piyush Pandey) ने अपने करियर में कई ऐसे विज्ञापन बनाए जो लोगों की यादों में अमर हो गए। उन्होंने कैडबरी का ‘कुछ खास है’, एशियन पेंट्स का ‘हर खुशी में रंग लाए’, फेविकोल के आइकॉनिक एड्स और हच का ‘व्हेयरएवर यू गो, आवर नेटवर्क फॉलोज़’ जैसे कई कैंपेन तैयार किए। इसके अलावा, उन्होंने 2014 में भारतीय राजनीति का मशहूर नारा ‘अब की बार मोदी सरकार’ भी दिया था, जिसने चुनावी माहौल में बड़ी भूमिका निभाई।
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ से हुई पहचान
पीयूष पांडेय ने 1988 में राष्ट्रीय एकता अभियान के लिए मशहूर गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ लिखा था, जो आज भी भारतीय एकता का प्रतीक माना जाता है। यह गीत उन्हें देशभर में पहचान दिलाने वाला साबित हुआ। उन्होंने फिल्म ‘भोपाल एक्सप्रेस’ की पटकथा का सह-लेखन किया और ‘मद्रास कैफे’ जैसी फिल्मों से भी जुड़े रहे।

विज्ञापनों में भावनाओं को केंद्र में रखा
पीयूष पांडेय (Piyush Pandey) का मानना था कि एक अच्छा विज्ञापन केवल दिमाग नहीं, बल्कि दिल को छूना चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘लोग आपके विज्ञापन को देखकर यह न कहें कि आपने यह कैसे किया, बल्कि कहें कि उन्हें यह बहुत पसंद आया।’ उनके विज्ञापन आम लोगों की भाषा, भावनाओं और सोच से गहराई से जुड़े रहे। यही वजह थी कि उन्होंने विज्ञापनों को अंग्रेजी से निकालकर आम भारतीय की बोली में ढाला और हर वर्ग तक पहुंचाया।
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जयपुर में हुआ जन्म, क्रिकेटर से बने एड गुरु
पीयूष पांडेय का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ था। उनके पिता बैंक में कार्यरत थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने क्रिकेट खेला और राजस्थान के लिए रणजी ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा। उनके परिवार में नौ भाई-बहन थे, जिनमें से उनके भाई प्रसून पांडे प्रसिद्ध निर्देशक हैं और बहन ईला अरुण जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री हैं।
चार दशकों तक ओगिल्वी इंडिया के साथ जुड़ाव
पीयूष पांडेय (Piyush Pandey) ने 1982 में ओगिल्वी इंडिया से अपना सफर शुरू किया और करीब चार दशक तक कंपनी से जुड़े रहे। वह कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) के पद पर कार्यरत थे। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया ने भारतीय विज्ञापन जगत में कई यादगार मुहिम चलाईं और भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक पहचान दिलाई।
पुरस्कार और सम्मान
विज्ञापन जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए पीयूष पांडेय को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। उन्हें वर्ष 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें 2024 में LIA Legend Award से भी नवाजा गया। उन्हें भारतीय विज्ञापन में स्वदेशी सोच और भावनात्मक जुड़ाव लाने का श्रेय दिया जाता है।

मित्रों ने दी श्रद्धांजलि
उनके करीबी मित्र और विज्ञापन विशेषज्ञ सुहेल सेठ ने सोशल मीडिया X पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘भारत ने विज्ञापन जगत की एक महान हस्ती को खो दिया है। पीयूष पांडे न केवल एक प्रतिभाशाली क्रिएटिव मस्तिष्क थे, बल्कि एक सच्चे देशभक्त भी थे। अब स्वर्ग में भी ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गूंजेगा।’
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विज्ञापन जगत के लिए अपूरणीय क्षति
पीयूष पांडेय (Piyush Pandey) का जाना भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए एक युग का अंत है। उन्होंने विज्ञापन को भारतीय भावना, संस्कृति और आम बोलचाल की भाषा से जोड़ा। उनके बनाए विज्ञापन सिर्फ उत्पाद नहीं बेचते थे, बल्कि लोगों के दिलों को छूते और समाज से जोड़ते थे। आज उनका नाम हमेशा उस इंसान के रूप में याद किया जाएगा जिसने विज्ञापन को एक कला और भावना बना दिया।
