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Noida News: बिल्डर की चालाकी से नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लाखों लोगों की ज़िंदगी दांव पर!

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Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा खतरे में है।

Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसायटियों (High Rise Societies) में रहने वाले लोग इन दिनों असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। जर्जर होती इमारतों और लटकते ढांचों के बीच स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) को लेकर की गई मांगें अब तक अधूरी हैं। नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) में अब तक 18 सोसायटीज़ ने ऑडिट के लिए आवेदन किया है, लेकिन बिल्डरों की अनदेखी और टालमटोल के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। पढ़िए पूरी खबर…

Pic Social Media

डर के साए में रह रहे लोग

नोएडा की कई सोसायटीज़ में लटकते सरिए, स्लैब से उखड़ी कंक्रीट, गिरता प्लास्टर, पिलरों में दरार और पानी का रिसाव आम दृश्य बन चुके हैं। इन खामियों के चलते लोग हर दिन एक खतरे के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। सेक्टर-78 की सिक्का कार्मिक ग्रीन सोसायटी में तो हाल ही में एक पिलर गिर गया, जो कार के पिछले हिस्से पर जा गिरा। सौभाग्य से, कुछ सेकंड पहले ही एक युवक वहां से साइकिल हटाकर निकला था।

प्राधिकरण ने जारी किए नोटिस, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई

नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) ने 8 जुलाई को तीन बिल्डरों को नोटिस जारी कर दो महीने के भीतर पैनल्ड एजेंसी से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी बिल्डरों ने न तो एजेंसी का चयन किया और न ही ऑडिट की प्रक्रिया शुरू की। कारण साफ है इस ऑडिट में आने वाला खर्च करोड़ों में है, जिससे बिल्डर पीछे हट रहे हैं।

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भारी बारिश में बढ़ा खतरा

बारिश के दौरान जर्जर इमारतों के गिरने का खतरा और अधिक बढ़ गया है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र में एक चार मंजिला मकान नींव में पानी भरने से ढह गया। जबकि नोएडा में 120 से अधिक हाईराइज इमारतें हैं, जिनमें से कई अभी अधूरी हैं, लेकिन लोग उनमें रह रहे हैं।

2023 में लागू हुई थी स्ट्रक्चरल ऑडिट पॉलिसी

मार्च 2023 में नोएडा प्राधिकरण ने स्ट्रक्चरल ऑडिट पॉलिसी लागू की थी। इसके तहत एक समिति बनाई गई जिसमें एसीईओ स्तर के अधिकारियों के अलावा डीजीएम सिविल, जनस्वास्थ्य और जल-सीवर विभाग के अफसर शामिल किए गए। हालांकि, पहले के निरीक्षण में तकनीकी विशेषज्ञों की गैरहाजिरी के कारण रिपोर्टें अधूरी रहीं।

सरकारी एजेंसियों पर अधिक भरोसा

वर्तमान में आठ सरकारी एजेंसियां जैसे आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली, बीआईटीएस पिलानी, दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय, एमएनएनआईटी इलाहाबाद, एमएमयू अलीगढ़, एमएनआईटी जयपुर और सीबीआरआई रुड़की स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए अधिकृत हैं। इसके अलावा, प्राधिकरण ने 10 निजी एजेंसियों को शामिल करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है।

नई-नई इमारतें भी हो रहीं जर्जर

ऑडिट के लिए आवेदन करने वाली अधिकांश इमारतें अधिकतम 15 वर्ष पुरानी हैं। कुछ तो केवल 5 वर्ष पहले ही बनी हैं। निरीक्षण में पाया गया कि कई इमारतों में कंक्रीट की परतें हट चुकी हैं, पिलरों से पानी रिस रहा है, स्टील का ढांचा दिखने लगा है, और स्लैब पर कंक्रीट की मात्रा भी कम है।

बिल्डर या एओए को करनी होगी ऑडिट की व्यवस्था

प्राधिकरण की नीति के अनुसार, पैनल्ड एजेंसी से बिल्डर को अपने खर्च पर ऑडिट कराना होगा। यदि सोसायटी का संचालन पिछले पांच सालों से एओए (Association of Apartment Owners) कर रही है, तो यह जिम्मेदारी एओए की होगी। यदि बिल्डर पीछे हटते हैं, तो प्राधिकरण ऑडिट कराएगा और खर्च की वसूली करेगा।

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नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल (Satish Pal) ने कहा जो नोटिस पहले जारी किए गए थे, वे आरएफपी जारी होने से पहले के हैं। अब नियमों में बदलाव किया गया है और निरीक्षण में पैनल्ड एजेंसियों की तकनीकी टीम भी शामिल रहेगी। ऑडिट की फीस का वहन बिल्डर या एओए द्वारा किया जाएगा।