Noida Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू हो चुकी हैं, लेकिन यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। एयरपोर्ट को देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में गिना जा रहा है, लेकिन मेट्रो और मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के अभाव में यात्रियों को फिलहाल कैब और निजी वाहनों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
एयरपोर्ट चालू, लेकिन मेट्रो अभी दूर
नोएडा एयरपोर्ट को भविष्य में मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां मेट्रो, रेल और बस सेवाएं जुड़ेंगी। हालांकि फिलहाल यात्रियों के पास सीधे मेट्रो की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए लोगों को कैब, टैक्सी या निजी वाहन का सहारा लेना पड़ रहा है।
कैब बनी सबसे बड़ा सहारा
एयरपोर्ट पर 24 घंटे टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं और ओला, उबर, रैपिडो समेत कई कंपनियों ने अपने काउंटर भी शुरू कर दिए हैं। इसके बावजूद यात्रियों का कहना है कि किराया अपेक्षाकृत अधिक है। नोएडा से एयरपोर्ट तक कैब का किराया करीब 1,000 से 1,200 रुपये तक पहुंच रहा है, जबकि कुछ रूट्स पर यह 3,000 रुपये तक भी जा सकता है।
बस सेवाएं शुरू, लेकिन पर्याप्त नहीं
उत्तर प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया है। हाल ही में 45 इलेक्ट्रिक बसों और 3 हाइड्रोजन बसों को हरी झंडी दिखाई गई थी। इसके बावजूद कई यात्रियों का मानना है कि एयरपोर्ट तक सीधी और नियमित बस सेवाओं का नेटवर्क अभी भी सीमित है।
यात्रियों ने उठाए कई सवाल
एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले यात्रियों ने सिर्फ परिवहन ही नहीं बल्कि अन्य सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई है। कई यात्रियों ने बाहर पर्याप्त सुविधाओं, वेटिंग एरिया, भोजन और मार्गदर्शन व्यवस्था की कमी की शिकायत की है। शुरुआती दिनों में वाई-फाई, वेंडिंग मशीन और अन्य सेवाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।
भविष्य में सुधरेगी तस्वीर
नोएडा एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। एनएचएआई दिल्ली से एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच के लिए 31 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा भविष्य में मेट्रो, नमो भारत और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को भी एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा।
शुरुआती उत्साह के साथ चुनौतियां भी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और आने वाले वर्षों में यह लाखों यात्रियों की सेवा करेगा। लेकिन फिलहाल एयरपोर्ट तक पहुंचने की सुविधा, सार्वजनिक परिवहन और यात्री सुविधाओं को मजबूत करना सबसे बड़ी जरूरत बनकर उभरा है। जब तक मेट्रो और व्यापक बस नेटवर्क पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक यात्रियों को कैब और निजी वाहनों पर ही अधिक निर्भर रहना पड़ेगा।
