Lakshchandi Mahayagya: 14-21 अप्रैल तक मध्यप्रदेश के ग्वालियर में होने वाले यज्ञों के महाकुंभ को विश्व हिंदू परिषद का भी साथ मिला है। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर श्री श्री 108 श्री स्वामी वैराग्य नंद जी महाराज ने इस पावन विषय पर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने आलोक कुमार जी से मुलाकात कर उनसे चर्चा की। खास मौके पर लक्षचंडी यज्ञ में अहम भूमिका निभाने वाले आनंद गिरि महाराज और वेल्थ ग्रुप कंपनीज के चेयरमैन कपिल कुमार भी मौजूद रहे। आलोक कुमार जी ने 1008 लक्षचंडी यज्ञ को अपना पूरा सहयोग देने का भी वादा किया है। आलोक कुमार जी ने इसे नेक पहल बताते हुए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यनंद जी महाराज को बधाई देते हुए इस यज्ञ की सफलता की कामना की है।
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श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरी जी महाराज ने लक्षचंडी यज्ञ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश की पावन धरती पर पहली बार लक्षचंडी यज्ञ का विशाल आयोजन होने जा रहा है जिसमें 150 टन देसी गाय के घी से यज्ञ में आहुति दी जाएगी। इस विशाल यज्ञ में 11 हजार पंडित शामिल होंगे जो अपने मंत्रोच्चार से यज्ञ को सफल बनाएंगे। इस विशेष आयोजन में 6 हजार यजमान आहुति देंगे। इस यज्ञ महाकुंभ के लिए देश विदेश के अतिथियों को निमंत्रण भेजा जा रहा है।
यज्ञ को लेकर स्वामी आनंद गिरी महाराज का मानना है कि पूजा और यज्ञ में एक महान गुण होता है जो दिव्य देवी से असीम आशीर्वाद दिलाता है। सभी क्षेत्रों में अपार ऊर्जा, नाम, प्रसिद्धि, शक्ति, विजय, स्वास्थ्य और सफलता पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का जप करना लाभदायक होता है।
वेल्थ ग्रुप कंपनीज के चेयरमैन कपिल कुमार के मुताबिक लक्षचंडी यज्ञ और पाठ एक बहुत ही अद्वितीय यज्ञोपवीत संस्कार है जिसमें शक्तिशाली सप्तशती मंत्र शामिल हैं और इसमें दुर्गा सप्तशती पाठ के 1 लाख पाठ शामिल हैं। यह पूजा अनुष्ठान बहुत ही दुर्लभ और अद्वितीय है।
लक्षचंडी यज्ञ एवं पाठ और इसके फायदे
लक्षचंडी यज्ञ मानसिक शक्ति को बढ़ाता है और व्यक्ति को भौतिक समृद्धि प्राप्त करने में मदद करता है। लक्षचंडी यज्ञ एक प्राचीन हवन प्रक्रिया है जो सनातन धर्म में महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह यज्ञ लक्ष्मी माता की कृपा प्राप्ति, धन, समृद्धि, और सम्पत्ति के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य धन की वृद्धि, व्यापार में सफलता, और प्रसन्नता की प्राप्ति होती है।
