Ladakh Protest

Ladakh Protest: नेपाल की तरह जल उठा लद्दाख, 4 की मौत, आखिर क्यों हो रहा है आंदोलन?

TOP स्टोरी Trending
Spread the love

Ladakh Protest: लद्दाख में इस मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को हिंसक हो गया।

Ladakh Protest: लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन (Agitation) बुधवार को हिंसक हो गया। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 पुलिस और सीआरपीएफ जवानों समेत 70 लोग घायल हुए। उपद्रवियों ने बीजेपी कार्यालय (BJP Office) और लेह स्वायत्त विकास परिषद के कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की, साथ ही करीब एक दर्जन वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर फायरिंग का सहारा लेना पड़ा। पूरे जिले में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। जानिए क्या है पूरा मामला…

Pic Social Media

ये भी पढ़ेंः क्या ज्योतिष से मौत को टाला जा सकता है?

हिंसा पर काबू पाने के लिए पुलिस की सख्ती

स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर फायरिंग का सहारा लेना पड़ा। पूरे जिले में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। वहीं, इस हिंसा के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा कर दी।

गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक को ठहराया जिम्मेदार

गृह मंत्रालय ने लेह में हुई हिंसा के लिए सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों से भीड़ को उकसाया। मंत्रालय के अनुसार, स्थिति शाम 4 बजे तक नियंत्रण में लाई जा चुकी थी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वांगचुक ने अनशन तोड़ने के बाद बिना किसी गंभीर प्रयास के एम्बुलेंस से अपने गांव के लिए रवाना हो गए।

इस बीच प्रशासन ने कांग्रेस नेता और पार्षद फुंतसोग स्टैंजिन सेपाग के खिलाफ हिंसा भड़काने का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने मंगलवार को एक भाषण दिया, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ा और अशांति फैली। हालात को देखते हुए दो दिवसीय लद्दाख वार्षिकोत्सव भी रद्द कर दिया गया है।

Pic Social Media

ख़बरीमीडिया के Whatsapp ग्रुप को फौलो करें https://whatsapp.com/channel/0029VaBE9cCLNSa3k4cMfg25

अनशन से लेकर बवाल तक

सोनम वांगचुक के नेतृत्व में एक समूह 10 सितंबर से भूख हड़ताल कर रहा था, जिसमें प्रतिदिन करीब 500 लोग हिस्सा लेते थे। केंद्र सरकार ने मांगों पर बातचीत के लिए 6 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल को बुलाया था, लेकिन इससे पहले ही बुधवार को आंदोलन हिंसक हो गया।

मंगलवार को दो आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद गुस्से में नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए और लेह एपेक्स बाडी (LAB) की युवा इकाई ने बंद का आह्वान किया।

Pic Social Media

कैसे भड़की हिंसा?

बुधवार सुबह धरनास्थल से एक जुलूस निकला जो जल्द ही उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी कार्यालय के पास पहुंचकर पथराव शुरू कर दिया। सीआरपीएफ और पुलिस के वाहन भी निशाने पर आ गए। लाठियों और आंसू गैस के बावजूद स्थिति बेकाबू हो गई।

प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी कार्यालय और कई वाहनों में आग लगा दी। लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के कार्यालय में भी तोड़फोड़ और आगजनी की गई। पूरे इलाके में पुलिस और अर्धसैनिक बल की तैनाती के साथ कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

पहले से दी गई थी हिंसा की चेतावनी

लेह एपेक्स बाडी के नेताओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि केंद्र सरकार के उदासीन रवैये के कारण आंदोलन उग्र हो सकता है। आरोप है कि सोनम वांगचुक भी नेपाल के जेन-जेड आंदोलन की तर्ज पर लोगों को उकसाने वाले बयान दे रहे थे। हालांकि, उन्होंने किसी राजनीतिक साजिश से इनकार किया है और हिंसा की निंदा की है।

बातचीत की कोशिशें और केंद्र की प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार ने आंदोलन की मांगों पर चर्चा के लिए हाई पावर कमेटी बनाई है। अब तक चार दौर की बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें पिछली बैठक 27 मई को हुई थी। केंद्र ने अगली बैठक के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की थी, लेकिन उससे पहले ही हालात बिगड़ गए।

Pic Social Media

ये भी पढ़ेंः PhonePe: फोनपे का जबरदस्त फीचर, सिर्फ़ 11 रुपए में 25000 का इंश्योरेंस

क्यों हो रहा है आंदोलन?

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत 31 अक्टूबर 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बने लद्दाख में लोग पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, राज्य लोक सेवा आयोग की स्थापना और लोकसभा में लद्दाख को दो सीटें देने की मांग भी की जा रही है।

लेह की लेह एपेक्स बाडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस मिलकर इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और केंद्र से संवाद में हैं।

क्या है संविधान की छठी अनुसूची?

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्तता देती है। इसके तहत स्वायत्त जिला परिषदें बनाई जाती हैं, जिन्हें भूमि, वन, रीति-रिवाज, विवाह, तलाक आदि मामलों में कानून बनाने का अधिकार होता है।

इसके अलावा, यह परिषदें स्थानीय विकास जैसे स्कूल, सड़क और बाजार की स्थापना और प्रबंधन कर सकती हैं। लद्दाख के लोग इसी प्रकार का विशेष दर्जा चाहते हैं जिससे उनकी जमीन, संस्कृति और रोजगार पर बाहरी हस्तक्षेप न हो।

ये भी पढ़ेंः ATM: अब ATM जाने की जरूरत नहीं, मोबाइल से ही निकाल सकेंगे कैश!

हिंसा की चेतावनी और नेपाल से तुलना

लेह एपेक्स बाडी ने सोमवार को केंद्र सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ हिंसा की चेतावनी दी थी। सोनम वांगचुक पर नेपाल जैसे ‘जेन जी आंदोलन’ की तर्ज पर लोगों को उकसाने का आरोप लगा, लेकिन उन्होंने हिंसा को आंदोलन का हिस्सा न होने की बात कही। केंद्र सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच तनाव के बीच, लद्दाख की मांगें अब राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन गई हैं।