Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने निवास कार्यालय से वर्चुअल माध्यम के जरिए इस कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय भी मौजूद रहे। कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य हाथियों के बेहतर संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए नई जानकारी और अनुभव साझा करना है।
संरक्षण प्रयासों से बढ़ी हाथियों की संख्या
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के लगातार संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जबकि वर्ष 2026 में उनकी संख्या बढ़कर करीब 450 हो गई है। यह उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की सफलता को दर्शाती है।
मानव-हाथी संघर्ष कम करना बड़ी चुनौती
वन मंत्री ने कहा कि हाथियों का विचरण अब सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों की सुरक्षा के साथ-साथ उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जनभागीदारी, लगातार निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए काम कर रही है।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन पर फोकस
कार्यशाला के दौरान वन मंत्री ने वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक रणनीति के तहत हाथियों के संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम तकनीकों और व्यावहारिक अनुभवों से परिचित कराती हैं।
विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य और संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों का संरक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इससे वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की क्षमता में भी वृद्धि होगी।
वन्यजीव संरक्षण में मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़
केदार कश्यप ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच बेहतर सहअस्तित्व स्थापित हो सके।
जैव विविधता संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम के अंत में वन मंत्री ने सभी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

