Jharkhand News: असम विधानसभा चुनाव 2026 के बीच चाय बागान से जुड़े आदिवासी मजदूरों का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव प्रचार के दौरान इस समुदाय की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और इसे अधिकार और पहचान का सवाल बताया।
ऐतिहासिक संघर्ष और पहचान की बात
हेमंत सोरेन ने कहा कि चाय बागान के आदिवासी मजदूरों ने असम के विकास में बड़ा योगदान दिया है, लेकिन उन्हें आज भी जमीन, शिक्षा और सामाजिक पहचान जैसे बुनियादी अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने इस मुद्दे को ऐतिहासिक अन्याय से जोड़ा।
आज भी कई समस्याओं से जूझ रहा समुदाय
उन्होंने बताया कि आज भी चाय बागान के मजदूर कम मजदूरी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा की कमी और जमीन की सुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह स्थिति दशकों बाद भी ज्यादा नहीं बदली है, जो एक बड़ी चिंता का विषय है।
ST दर्जे की मांग बनी मुख्य मुद्दा
हेमंत सोरेन ने इस समुदाय के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग को भी जोर से उठाया। उनका कहना है कि झारखंड में इसी समुदाय को ST का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन असम में ऐसा नहीं है, जिससे उन्हें कई सरकारी लाभ नहीं मिल पाते।
चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है यह मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि असम में चाय बागान से जुड़े आदिवासी समुदाय की संख्या काफी बड़ी है, इसलिए यह मुद्दा चुनाव परिणामों पर असर डाल सकता है। कई क्षेत्रों में ये मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
सिर्फ राजनीति नहीं, अधिकार की बात
हेमंत सोरेन ने साफ किया कि यह सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि संविधान के तहत अधिकार और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस समुदाय की आवाज बनने का प्रयास कर रही है।
नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है
असम चुनाव में यह मुद्दा नई राजनीतिक दिशा भी दे सकता है। आदिवासी और चाय बागान मजदूरों को साथ जोड़ने की कोशिश से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और नई राजनीति उभर सकती है।
