Diwali Gift: दिवाली के मौके पर मिलने वाले बोनस का इंतजार कर्मचारी पूरे साल करते हैं।
Diwali Gift: दिवाली के मौके पर हर कर्मचारी (Employee) को अपनी कंपनी से किसी न किसी बोनस या गिफ्ट की उम्मीद रहती है। लेकिन हरियाणा के सोनीपत जिले (Sonipat District) के इस इलाके में स्थित एक फैक्ट्री के कर्मचारियों के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। यहां दिवाली बोनस (Diwali Bonus) की जगह सोनपापड़ी का डिब्बा मिलने पर कर्मचारी भड़क गए और विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। देखिए पूरा वीडियो…
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आपको बता दें कि हरियाणा के सोनीपत में एक कंपनी के कर्मचारियों के लिए इस बार की दिवाली की मिठास कड़वाहट में बदल गई। गन्नौर इलाके की एक फैक्ट्री में कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट के तौर पर बोनस की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें सिर्फ सोनपापड़ी के डिब्बे थमा दिए गए। इससे नाराज कर्मचारियों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया और कंपनी के गेट पर मिठाई के डिब्बे फेंक दिए। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे अब तक 14 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
बोनस की जगह मिठाई, भड़का गुस्सा
कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें साल भर की मेहनत के बदले बोनस देने के बजाय सिर्फ सोनपापड़ी का डिब्बा पकड़ाया। वायरल वीडियो में दर्जनों कर्मचारी गुस्से में मिठाई के पैकेट हाथों में लिए कंपनी के गेट पर खड़े नजर आ रहे हैं। कुछ कर्मचारी डिब्बों को जमीन पर फेंक रहे हैं, तो कुछ अपने साथियों को और मिठाई फेंकने के लिए उकसा रहे हैं। यह नजारा देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति जताई और कंपनी की इस हरकत को ‘कंजूसी’ करार दिया। एक यूजर ने लिखा, ‘कर्मचारी पूरे साल मेहनत करते हैं और दिवाली पर एक अच्छे गिफ्ट की उम्मीद रखते हैं। ऐसी चिंदीचोरी नहीं करनी चाहिए।’ वहीं, एक अन्य ने कहा, ‘ऐसे मालिकों को शर्म आनी चाहिए। कर्मचारी साल भर जी-तोड़ मेहनत करते हैं, और बदले में सिर्फ मिठाई? बोनस के लिए कानून बनना चाहिए।’

खाने की बर्बादी पर सवाल
लेकिन, कुछ लोगों ने कर्मचारियों के इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, ‘यह रवैया गलत है। खाने का अपमान नहीं करना चाहिए। अगर बोनस चाहिए, तो औपचारिक रूप से मांग की जा सकती है।’ एक अन्य ने कहा, ‘बोनस देना जरूरी नहीं है, यह खुशी बांटने का तरीका है। हर कंपनी करोड़ों नहीं कमाती। मैंने 14 साल तक बिना बोनस के काम किया और कभी शिकायत नहीं की।’ इस तरह की टिप्पणियों ने बहस को और गर्म कर दिया।
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क्या है असल मुद्दा?
यह घटना एक बार फिर कर्मचारियों की उम्मीदों और कंपनियों की नीतियों के बीच के टकराव को उजागर करती है। जहां कर्मचारी साल भर की मेहनत के बदले बोनस की उम्मीद करते हैं, वहीं कुछ कंपनियां इसे वैकल्पिक मानती हैं। इस वायरल वीडियो ने न केवल सोनपापड़ी को चर्चा में ला दिया, बल्कि कार्यस्थल पर बोनस और कर्मचारी संतुष्टि जैसे मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
