Jharkhand News: चंपाई सोरेन का हेमंत सरकार पर हमला, कहा- आदिवासियों के अधिकारों से हो रहा खिलवाड़

झारखंड
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Jharkhand News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। सरायकेला में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने पेसा (PESA) नियमावली को लेकर हेमंत सोरेन सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार ने आदिवासियों के अधिकारों को कमजोर करने का काम किया है। उनका कहना है कि पेसा कानून की मूल भावना को बदल दिया गया है, जिससे आदिवासी समाज के अधिकारों और परंपराओं पर असर पड़ेगा।

नियमावली को छिपाने का लगाया आरोप

चंपाई सोरेन ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक पेसा नियमावली को सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के दबाव और विपक्ष की मांगों के बाद नियमावली सामने लाई गई। उनके अनुसार, नियमावली सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकार इसे सार्वजनिक करने से क्यों बच रही थी। उन्होंने कहा कि नए नियम आदिवासी समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं और इससे ग्राम सभाओं की ताकत कम होगी।

पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक प्रथाओं पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नई नियमावली में कई ऐसे प्रावधानों को हटा दिया गया है जो आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की पहचान केवल प्रशासनिक संस्था नहीं है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि इन तत्वों को कमजोर किया जाता है तो पेसा कानून का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा।

ग्राम सभा के अधिकार सीमित करने का आरोप

चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि नई नियमावली में ग्राम सभाओं के अधिकारों को पहले की तुलना में सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ग्राम सभा की भूमिका कम की गई है। उनके अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन नई व्यवस्था में कई अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में चले गए हैं।

उपायुक्त को अधिक अधिकार देने पर जताई आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई नियमावली में कई फैसलों का अधिकार उपायुक्त को दे दिया गया है। उनका आरोप है कि इससे ग्राम सभाओं की स्वायत्तता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि पहले जिन मामलों में ग्राम सभा की स्वीकृति जरूरी थी, अब वहां उसकी भूमिका सीमित कर दी गई है। इससे स्थानीय लोगों की भागीदारी कम होने की आशंका है।

आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का दावा

चंपाई सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए वे लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने सरकार से नियमावली की समीक्षा करने और आदिवासी समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव करने की मांग की। उनका कहना है कि पेसा कानून का उद्देश्य आदिवासी स्वशासन को मजबूत करना है और किसी भी स्थिति में इसकी मूल भावना से समझौता नहीं होना चाहिए।

पेसा नियमावली को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

चंपाई सोरेन के बयान के बाद झारखंड की राजनीति में पेसा नियमावली को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि नियमावली कानून के अनुरूप बनाई गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।