Strike: दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई तक तीन दिन की बड़ी ट्रांसपोर्ट हड़ताल का ऐलान किया गया है। इस हड़ताल का असर टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और अन्य कमर्शियल वाहनों की सेवाओं पर पड़ सकता है, जिससे आम लोगों को आने-जाने में परेशानी होने की संभावना है।
यह “चक्का जाम” All India Motor Transport Congress और United Front of All Transport Associations के नेतृत्व में किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि 68 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट यूनियन इस आंदोलन का समर्थन कर रही हैं।
क्यों हो रही है हड़ताल?
ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों, वाहन संचालन खर्च और लंबे समय से किराए में बढ़ोतरी न होने के कारण ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।
चालक संगठनों के अनुसार पिछले करीब 15 सालों से टैक्सी किराए में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि सीएनजी, बीमा, फिटनेस और परमिट जैसे खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
ड्राइवरों ने जताई नाराजगी
चालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कई ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि दिन-रात मेहनत करने के बावजूद उनकी आय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
ड्राइवर संगठनों का कहना है कि सरकार से कई बार बातचीत की गई, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
4 लाख से ज्यादा वाहन मालिकों के समर्थन का दावा
यूनियनों का दावा है कि करीब 4 लाख पंजीकृत टैक्सी मालिक इस हड़ताल का समर्थन करेंगे और तीन दिनों तक अपनी सेवाएं बंद रखेंगे। इससे दिल्ली-एनसीआर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने कहा है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। यूनियनों ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की कुछ नीतियों का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि इन नीतियों से चालकों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
