DDA Flat: दिल्ली में बढ़ती आबादी और महंगे होते घरों के बीच अब आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने नई ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत राजधानी में मेट्रो कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर किफायती आवास परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाएं और सार्वजनिक परिवहन के पास आवास उपलब्ध कराना है।
मेट्रो कॉरिडोर के पास 14 बड़े भूखंड चिन्हित
डीडीए ने नई हाउसिंग परियोजनाओं के लिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में 14 प्रमुख भूखंडों की पहचान की है। इन जमीनों पर आने वाले समय में आवासीय और मिश्रित उपयोग वाले प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे। इस पूरी योजना को लेकर हाल ही में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।
बताया जा रहा है कि इन परियोजनाओं से दिल्ली में रहने वाले लाखों लोगों को फायदा मिलेगा, खासकर उन परिवारों को जो मेट्रो के पास बेहतर और सस्ती हाउसिंग की तलाश में हैं।
निजी बिल्डर्स को भी मिलेगा मौका
डीडीए इस योजना में निजी डेवलपर्स को भी शामिल करने जा रहा है। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा, जहां TOD नीति के तहत चिन्हित जमीनों का पूरा विवरण उपलब्ध रहेगा। निजी डेवलपर्स भी अपने भूखंडों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर विकास की अनुमति मांग सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही डेवलपमेंट प्लान स्वीकृत होगा, जमीन का लैंड यूज स्वतः TOD श्रेणी में बदल जाएगा। फिलहाल चार निजी डेवलपर्स इस योजना में रुचि भी दिखा चुके हैं।
क्या है TOD नीति और क्यों है खास?
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD नीति का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास व्यवस्थित शहरी विकास करना है। नई नीति के तहत मेट्रो लाइन के दोनों ओर 500 मीटर तक के क्षेत्र को TOD कॉरिडोर माना गया है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के आसपास के 500 मीटर इलाके को भी इसमें शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि इससे लोग मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन के करीब रह सकेंगे, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी।
3.6 लाख वर्ग मीटर जमीन पर बनेगा नया आवास नेटवर्क
डीडीए द्वारा चिन्हित सभी भूखंडों का कुल क्षेत्रफल 3.6 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा बताया गया है। ये जमीनें दिल्ली मेट्रो की ब्लू, रेड, ग्रीन, पिंक और येलो लाइन के आसपास स्थित हैं।
पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन, झिलमिल, प्रीत विहार, कड़कड़डूमा और मंडावली-फजलपुर जैसे इलाकों को इस योजना से बड़ा फायदा मिलने वाला है। वहीं द्वारका सेक्टर-10 और सेक्टर-12 के पास भी नए आवासीय प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे।
इसके अलावा रोहिणी सेक्टर-18, मादीपुर और पीरागढ़ी को भी योजना में शामिल किया गया है।
पीरागढ़ी और कड़कड़डूमा होंगे बड़े केंद्र
ग्रीन लाइन के पास पीरागढ़ी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के नजदीक आउटर रिंग रोड पर स्थित लगभग 1.24 लाख वर्ग मीटर का विशाल भूखंड इस परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
वहीं ब्लू लाइन कॉरिडोर पर कड़कड़डूमा में कैलाश दीपक अस्पताल के पीछे स्थित भूखंड को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि दिल्ली का पहला चालू TOD प्रोजेक्ट भी कड़कड़डूमा में ही विकसित किया गया था।
बिल्डर्स को नियमों में बड़ी राहत
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी TOD रेगुलेशंस 2026 के तहत डेवलपर्स को कई राहतें दी गई हैं। अब न्यूनतम प्लॉट साइज घटाकर 2,000 वर्ग मीटर कर दिया गया है, जिससे छोटे डेवलपर्स भी इस योजना में भाग ले सकेंगे।
इसके अलावा फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को बढ़ाकर 400 तक किया गया है, जिसे अतिरिक्त शुल्क देकर 500 तक बढ़ाया जा सकेगा। दिल्ली में TOD शुल्क भी एक समान 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है।
हरियाली और खुले क्षेत्र पर भी रहेगा फोकस
नई नीति में ग्रीन स्पेस को भी विशेष महत्व दिया गया है। डेवलपर्स को कुल जमीन का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र और खुले स्थान के रूप में रखना अनिवार्य होगा। साथ ही ज्यादा हरियाली विकसित करने वाले बिल्डर्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने पर भी विचार किया जा रहा है।
दिल्ली की हाउसिंग व्यवस्था में आ सकता है बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि TOD नीति दिल्ली की हाउसिंग और शहरी विकास व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। मेट्रो के आसपास योजनाबद्ध विकास से लोगों को बेहतर जीवनशैली, कम यात्रा समय और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही यह योजना दिल्ली में बढ़ती हाउसिंग डिमांड को संतुलित करने में भी मददगार साबित हो सकती है।
