Credit Card Limit

Credit Card Limit: क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़वाने वाले ख़बर जरूर पढ़ें

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Credit Card Limit बढ़वाने से पहले यह खबर पढ़ लीजिए

Credit Card Limit: अगर आप भी अपने क्रेडिट कार्ड (Credit Card) की लिमिट बढ़वाने का सोच रहे हैं तो यह खबर जरूर पढ़ लीजिए। क्रेडिट कार्ड की लिमिट (Credit Card Limit) बढ़वाने से पहले जरा सावधान हो जाइए। आपको बता दें कि नोएडा (Noida) में क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर लोगों के साथ ठगी करने वाला एक गैंग को पुलिस (Police) ने पकड़ा है। गैंग के 6 आरोपी लोगों को ऑनलाइन झांसे (Online Scams) में फंसाकर उन्हें अपना शिकार बनाते थे। पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी अब तक सैकड़ों लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने इनके पास से 28 मोबाइल फोन, 12 चांदी और 4 सोने के सिक्के बरामद किए हैं। इसके साथ ही एक आई-10 कार और जुपिटर स्कूटी भी मिली है।
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Pic Social media

ऐसे हासिल करते थे जानकारी

इस मामले को लेकर एडीसीपी मनीष मिश्रा (ADCP Manish Mishra) ने जानकारी दी कि आरोपियों को थाना सेक्टर- 39 पुलिस ने पकड़ा है। आरोपियों की पहचान अमित कुमार, तेज सिंह, विकास झा, रविकांत मौर्य, नागेंद्र शर्मा और नवाब खान के रूप में हुई है। ये लोग गोदरेज बिल्डिंग के पास मॉल में सस्ते दामों पर बेचने आए थे। एडीसीपी मनीष मिश्रा ने आगे जानकारी दी कि ये डार्क वेब और दूसरे माध्यमों से क्रेडिट कार्ड धारकों की जानकारी हासिल करते थे और उन्हें कॉल करते थे। उन्हें क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का ऑफर देते थे। अप्लाई करने के लिए हम उन्हें एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजते थे जो बिल्कुल बैंकों की वेबसाइट की तरह ही होती थी। लिंक पर क्लिक करते ही डाउनलोड का ऑप्शन आने लगता था। इस पूरी स्क्रीन पर एक फर्जी पेज ओपन होता था जो बिल्कुल गूगल प्ले स्टोर जैसा दिखता थे। जिससे लोगों को लगता कि वे बैंक का असली ऐप डाउनलोड कर रहे हैं।

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जानिए कैसे बनाते थे अपना शिकार

एडीसीपी के मुताबिक फिर उनसे उसी ऐप को इंस्टॉल करने के लिए बटन पर क्लिक करवाया जाता और एसएमएस पढ़ने की अनुमति देने को आता था। एक फॉर्म खुलता था। जिसमें ग्राहक से क्रेडिट कार्ड (Credit Card) की सारी जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, ईमेल, पैन, मोबाइल नंबर, शहर, कुल लिमिट, कार्ड धारक का नाम, कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, सीवीवी आदि भरने को कहा जाता था। फॉर्म सबमिट करने पर फर्जी वेबसाइट के एडमिन पैनल पर जानकारी हासिल हो जाती थी। एसएमएस पढ़ने की अनुमति मिलने से ग्राहक के मोबाइल पर आए सभी एसएमएस भी वेबसाइट पर दिखाई देने लगते थे। जिसके बाद मिली जानकारी और ओटीपी की सहायता से ग्राहक के क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन ई-कॉमर्स वेबसाइट जैसे फ्लिपकार्ट आदि पर मोबाइल फोन, सोने-चांदी के सिक्के आदि कीमती सामान मंगवा लिए जाते।