Punjab News: पंजाब में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है जिसने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर प्रभावी लगाम लगाने की पहल की है।
5% से ज्यादा फीस बढ़ाने पर रोक की तैयारी
केजरीवाल ने बताया कि पंजाब सरकार जल्द एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत कोई भी निजी स्कूल एक साल में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। इसमें ट्यूशन फीस के साथ-साथ लाइब्रेरी, डेवलपमेंट और अन्य सभी प्रकार की फीस शामिल होगी।
अभिभावकों को वापस मिलेगी अतिरिक्त फीस
सरकार का सबसे बड़ा फैसला यह है कि पिछले तीन वर्षों में जिन स्कूलों ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त राशि अभिभावकों को लौटानी होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्कूल ने तीन साल में 50 प्रतिशत फीस बढ़ाई है, तो उसे 15 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ाई गई 35 प्रतिशत राशि वापस करनी होगी।
दिल्ली मॉडल अब पंजाब में
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इससे पहले दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस वापस कराई थी। अब उसी मॉडल को पंजाब में लागू किया जा रहा है ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों पर भी फोकस
केजरीवाल ने कहा कि सरकार एक तरफ सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार रही है, वहीं दूसरी तरफ निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके परिवारों को भी आर्थिक राहत देने का काम कर रही है।
माता-पिता पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने की कोशिश
उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन कई निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के कारण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। नया कानून इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।
देशभर में लागू करने की मांग
केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ने जो पहल की है, उसे देश के अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर नियंत्रण जरूरी है।
अभिभावकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यदि यह कानून लागू होता है तो लाखों परिवारों को सीधे आर्थिक राहत मिल सकती है। साथ ही स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर निगरानी बढ़ेगी और शिक्षा क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता आएगी।
