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Chhattisgarh News: कभी बंदूक थामे हाथ अब बना रहे रोज़गार, आत्मसमर्पित माओवादियों का बदल रहा भविष्य

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा का रास्ता अपनाया था, आज वही हाथ अपने हुनर से नए भविष्य की इबारत लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के पास ग्राम चौगेल स्थित पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवक-युवतियां अब काष्ठ कला से नेम प्लेट, सरकारी लोगो, ग्राम पंचायतों के बोर्ड, की-रिंग और अन्य सजावटी सामग्री तैयार कर रहे हैं। इसके साथ ही कपड़े के थैले और कार्यालय उपयोग की सामग्री बनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

चौगेल कैंप बना कौशल विकास का केंद्र

वर्षों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर संभाग अब विकास और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार की पुनर्वास नीति-2025 के तहत चौगेल (मुल्ला) कैम्प को कौशल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। कभी सुरक्षा बलों का कैंप रहा यह स्थान अब हुनर सिखाने वाला केंद्र बन चुका है, जहां जिला प्रशासन द्वारा मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग और राजमिस्त्री जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण के साथ-साथ उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पढ़ाई के लिए आवश्यक पुस्तकें और सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं, वहीं योग्य शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराती है। इसके अलावा कैम्प में मनोरंजन और खेल गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित हो सके।

स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को स्वरोजगार के लिए सशक्त बनाने हेतु कृषि, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और पशुधन विकास विभागों के सहयोग से कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। ‘बिहान’ योजना के माध्यम से भी उन्हें विभिन्न रोजगार अवसरों की जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में सिलाई मशीन, काष्ठ शिल्प और असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे हैं।

प्रशिक्षण के बाद रोजगार देने वाला पहला जिला बना कांकेरकांकेर जिला प्रशिक्षण के बाद आत्मसमर्पित माओवादियों को रोजगार उपलब्ध कराने वाला प्रदेश का पहला जिला बन गया है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने स्वयं तीन नक्सल पीड़ितों और एक आत्मसमर्पित माओवादी को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा।
इनमें सगनूराम आंचला, रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। इन सभी को निजी फर्म में नियुक्त किया गया है, जहां उन्हें लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय और अन्य वित्तीय सुविधाएं मिलेंगी।

नौकरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए बीरसिंह मंडावी ने कहा कि चौगेल कैम्प ने उन्हें नया जीवन दिया है। यहां उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण देकर कुशल बनाया गया और प्रशिक्षण के बाद रोजगार भी उपलब्ध कराया गया, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सके हैं।