Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना और बजट प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही समग्र शिक्षा के अंतर्गत स्वीकृत नए कार्यों, निर्माण योजनाओं और विभिन्न प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि केवल भवन निर्माण ही शिक्षा सुधार का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट योजना इस तरह तैयार की जाए जिससे स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर हो और हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।
डिजिटल शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं पर रहेगा जोर
राज्य सरकार अब स्कूलों में तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। बैठक में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब स्थापित करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा सभी स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की जा रही है।
मुख्य सचिव ने कहा कि आज के समय में डिजिटल शिक्षा बेहद जरूरी है और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। इससे छात्रों को बेहतर सीखने का अवसर मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।
ड्रॉपआउट रोकने के लिए बनेगा विशेष सिस्टम
बैठक में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की समस्या पर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कक्षा 1, 8 और 10 में ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। इसके लिए एक ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
इसके साथ ही शाला त्यागी बच्चों के लिए ब्रिज कोर्स चलाने की योजना पर भी जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से दूर न रहे और सभी को समान अवसर मिल सके।
शिक्षक प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाओं को मिलेगी मजबूती
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के लिए विशेष मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहां अतिरिक्त कक्षाएं, बालिका शौचालय, पेयजल, बिजली और बाउंड्रीवॉल जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। सरकार का मानना है कि बेहतर वातावरण मिलने से बच्चों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
समावेशी शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान
बैठक में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उनके लिए संसाधन कक्ष, थेरेपी यूनिट और विशेष शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ ही कक्षा 9 से 12 तक व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
कृषि, आईटी, हेल्थकेयर और पर्यटन जैसे क्षेत्रों से जुड़े कोर्स स्थानीय जरूरतों के अनुसार शुरू किए जाएंगे। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर भी मिल सकेंगे।
