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Bad News: 2025 तक AI खा जाएगा ज्यादातर नौकरी, सिर्फ़ बचेंगे ये काम!

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Bad News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने नौकरियों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Bad News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ती जा रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि 2025 से लेकर 2045 तक AI और रोबोटिक्स के क्षेत्र में इतना बड़ा बदलाव आएगा कि यह अधिकतर मानवीय नौकरियों को खत्म कर सकता है। RethinkX के रिसर्च डायरेक्टर एडम डोर (Adam Door) ने इस संबंध में बड़ा दावा करते हुए चेतावनी दी है कि सोचने और काम करने वाली मशीनें इंसानों की जगह लेने को पूरी तरह तैयार हैं। पढ़िए पूरी खबर…

Pic Social Media

AI की रफ्तार से बदल जाएगा नौकरियों का चेहरा

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए एक इंटरव्यू में एडम डोर (Adam Door) ने कहा कि, ‘AI तेजी से स्मार्ट होता जा रहा है और आने वाले वर्षों में यह इंसानों द्वारा किए जाने वाले ज्यादातर काम खुद कर सकेगा।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि मशीनें कई काम तेजी, कुशलता और कम लागत में करने में सक्षम होंगी, जिससे उन्हें इंसानों पर वरीयता मिलेगी।

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2045 तक खत्म हो सकती हैं ज्यादातर नौकरियां

एडम डोर का कहना है कि उन्होंने और उनकी टीम ने इतिहास की 1,500 से ज्यादा बड़ी तकनीकी क्रांतियों का अध्ययन किया है। इसके आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि कोई भी नई टेक्नोलॉजी एक बार जब जमीनी पकड़ बना लेती है, तो 15-20 वर्षों के भीतर पूरी व्यवस्था को बदल देती है। AI भी उसी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

कौन-सी नौकरियां हैं सबसे ज्यादा खतरे में?

रिसर्च के मुताबिक, वे नौकरियां जिनमें साधारण वर्कफ्लो और रिपिटेटिव टास्क शामिल हैं जैसे कॉल सेंटर एजेंट, डाटा एंट्री क्लर्क, फ्रंट डेस्क स्टाफ, अकाउंटिंग असिस्टेंट्स आदि सबसे पहले AI की चपेट में आएंगी। डोर का मानना है कि जैसे-जैसे AI की लागत कम और गुणवत्ता बेहतर होगी, वैसे-वैसे लगभग हर सेक्टर में मानव श्रम की जरूरत कम होती जाएगी।

ये पेशे रहेंगे सुरक्षित

लेकिन, एडम डोर ने यह भी कहा कि कुछ पेशे ऐसे हैं जो AI से प्रभावित नहीं होंगे। इनमें राजनेता, यौनकर्मी, नैतिक निर्णय लेने वाले पेशेवर और ऐसे काम शामिल हैं जिनमें इमोशनल इंटेलिजेंस या विश्वास की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि AI इन क्षेत्रों में काम करने में सक्षम नहीं है और ये कार्य इंसानों के ही हाथों में रहेंगे।

नया आर्थिक मॉडल जरूरी

एडम डोर ने चेतावनी दी कि यदि सरकारें और समाज समय रहते नए आर्थिक मॉडल नहीं अपनाते हैं, तो AI से उत्पन्न होने वाली ऑटोमेशन की लहर से बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएं गहरा सकती हैं। उनका कहना है कि दुनिया में 4 अरब से ज्यादा लोगों को रोज़गार देने की जरूरत है, लेकिन AI के बाद जो नई नौकरियां पैदा होंगी, वे न तो इतनी होंगी और न ही आज जैसी होंगी।

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क्या कहते हैं अन्य AI एक्सपर्ट?

बता दें कि एक्सपर्ट (Expert) कहते है कि ऐसे समय में आई है जब AI को लेकर दुनिया भर में बहस तेज है। AI के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन पहले ही सामान्य बौद्धिक कार्यों वाले कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी बजा चुके हैं। वहीं OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन और Meta के प्रमुख AI वैज्ञानिक यान लेकुन का कहना है कि AI भविष्य में लेबर मार्केट को पूरी तरह बदल देगा और इससे नए प्रकार की नौकरियां भी जन्म लेंगी। लेकिन, उनका यह भी मानना है कि ये नौकरियां आज की नौकरियों से बिल्कुल अलग होंगी।