Punjab News: चंडीगढ़, 20 जुलाई। पंजाब सरकार ने नशा मुक्ति उपचार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के तहत मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (MMT) की शुरुआत की है। सरकार के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त उपचार पद्धति लंबे समय से सिंथेटिक ओपिओइड नशे की लत से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अतिरिक्त उपचार विकल्प उपलब्ध कराएगी।
राज्य में छह मेथाडोन क्लीनिक शुरू, छह और खुलेंगे
सरकार ने बताया कि फिलहाल फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, गुरदासपुर, मोहाली और जालंधर में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। आने वाले महीनों में छह और केंद्र खोले जाएंगे, जिससे राज्य में ऐसे क्लीनिकों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी।
मौजूदा उपचार व्यवस्था को मिलेगा नया विकल्प
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पंजाब में अब तक 500 से अधिक आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) केंद्रों के माध्यम से मुख्य रूप से ब्यूप्रेनोर्फिन आधारित ओपिओइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी दी जा रही थी। मेथाडोन थेरेपी उन मरीजों के लिए अतिरिक्त विकल्प होगी, जिन पर मौजूदा उपचार अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- पुनर्वास में मिलेगी मदद
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे उपचार के परिणाम बेहतर होंगे और मरीजों के दोबारा नशे की ओर लौटने की संभावना कम होगी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मरीजों को स्वस्थ जीवन के साथ परिवार और समाज में दोबारा स्थापित करने में मदद करना है।
काउंसलिंग और नियमित निगरानी की भी होगी सुविधा
सरकार के अनुसार, नए मेथाडोन क्लीनिकों में मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में दवा देने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, मनोचिकित्सा परामर्श, रिलैप्स प्रिवेंशन सेवाएं, पारिवारिक काउंसलिंग और नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मरीजों को निर्धारित खुराक लेने के लिए प्रतिदिन क्लीनिक आना होगा, जहां डॉक्टरों की निगरानी में दवा दी जाएगी।
क्या है मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी?
मेथाडोन एक लंबी अवधि तक असर करने वाली दवा है, जिसका उपयोग ओपिओइड यूज डिसऑर्डर से पीड़ित मरीजों के इलाज में किया जाता है। यह मस्तिष्क के उन रिसेप्टर्स पर कार्य करती है, जिन पर हेरोइन और अन्य सिंथेटिक ओपिओइड प्रभाव डालते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दवा नशे की तीव्र इच्छा (क्रेविंग) को नियंत्रित करने, नशा छोड़ने के लक्षणों को कम करने और मरीज को उपचार एवं सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करती है। सरकार का कहना है कि चिकित्सकीय निगरानी में दवा दिए जाने से इसके दुरुपयोग की संभावना भी काफी कम रहती है।
