Chhattisgarh News: राईस मिलों के आधुनिकीकरण और गुणवत्ता सुधार पर सरकार का जोर

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में भारत सरकार की नई ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को लागू करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। रायपुर के न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस में इस योजना को लेकर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन, भारतीय खाद्य निगम (FCI), मार्कफेड और प्रदेशभर के राईस मिलर्स के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नई स्कीम को प्रभावी, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से लागू करने को लेकर चर्चा करना था। अधिकारियों और मिलर्स के बीच योजना से जुड़ी तकनीकी, व्यवहारिक और गुणवत्ता संबंधी पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया गया।

राईस मिलों के आधुनिकीकरण पर रहेगा फोकस

कार्यशाला को संबोधित करते हुए खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि भारत सरकार आगामी खरीफ विपणन वर्ष में ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को प्राथमिकता के साथ लागू करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य की राईस मिलों को तकनीकी रूप से उन्नत बनाना बेहद जरूरी होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए मिलों का आधुनिकीकरण आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने राईस मिलर्स को भरोसा दिलाया कि कार्यशाला में सामने आई व्यवहारिक समस्याओं और सुझावों का परीक्षण कर आवश्यक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जाएंगे।

गुणवत्ता मानकों और मिलिंग प्रक्रिया पर हुई चर्चा

बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से लागू होने वाली योजना के विभिन्न प्रावधानों, भंडारण व्यवस्था, अनुबंध प्रक्रिया, लागत और गुणवत्ता मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल और 5 प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी।

इस दौरान मिलिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने और चावल की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि नई स्कीम के तहत गुणवत्ता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा ताकि राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मानक बनाए जा सकें।

राईस मिलर्स ने रखीं अपनी चुनौतियां

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने उद्योग से जुड़ी व्यवहारिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। मिलर्स ने उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने, भारतीय खाद्य निगम में रैक मूवमेंट तेज करने और मिलिंग लागत बढ़ने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि योजना को सफल बनाने के लिए तकनीकी और आधारभूत सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। मिलर्स ने सरकार से सहयोग और व्यावहारिक समाधान की मांग भी रखी।

योजना के सफल क्रियान्वयन का दिया भरोसा

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कान्ति लाल बोथरा, महामंत्री विष्णु बिंदल और कोषाध्यक्ष रमेश अग्रवाल सहित प्रदेशभर से आए करीब 60 से अधिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

सभी प्रतिभागियों ने योजना लागू करने से पहले इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित करने के लिए खाद्य विभाग का आभार जताया और ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ के सफल क्रियान्वयन में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में मार्कफेड के एमडी जितेन्द्र शुक्ला और भारतीय खाद्य निगम के जीएम दीपक शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।