Punjab News: पंजाब सरकार ने भूजल बचाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Gurmeet Singh Khudian ने घोषणा की है कि राज्य सरकार ने 2026-27 खरीफ सीजन के दौरान 5 लाख एकड़ भूमि को डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक के तहत लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है।
किसानों को मिलेगा ₹1500 प्रति एकड़ प्रोत्साहन
सरकार DSR तकनीक अपनाने वाले किसानों को ₹1500 प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दे रही है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन DSR रजिस्ट्रेशन पोर्टल भी शुरू कर दिया गया है, ताकि किसान आसानी से आवेदन कर सकें।
पिछले साल हजारों किसानों ने अपनाई तकनीक
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि 2025 खरीफ सीजन में 23,410 किसानों ने DSR तकनीक अपनाई थी। इस दौरान 2,35,899 एकड़ में धान की सीधी बुवाई की गई। सरकार ने इन किसानों को 35.38 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की।
क्या है DSR तकनीक?
डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक में धान की नर्सरी तैयार करने और खेत में रोपाई करने की जरूरत नहीं होती। किसान सीधे खेत में बीज बो सकते हैं। इससे पानी की खपत 15 से 20 प्रतिशत तक कम होती है और मजदूरी का खर्च भी घटता है।
भूजल बचाने की बड़ी कोशिश
पंजाब लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहा है। सरकार का मानना है कि DSR तकनीक पानी बचाने में काफी मददगार साबित हो सकती है। कृषि मंत्री ने इसे “पानी बचाने की किसान-नेतृत्व वाली क्रांति” बताया और अधिक से अधिक किसानों से इस तकनीक को अपनाने की अपील की।
पर्यावरण और किसानों दोनों को फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, DSR तकनीक से किसानों की लागत कम होगी, सिंचाई में पानी की बचत होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। साथ ही यह तकनीक पंजाब में खेती को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
