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VIP Number: चंडीगढ़ में 0001 नंबर की दीवानगी, बोली सुनकर हैरान रह जाएंगे

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VIP Number: चंडीगढ़ में वाहनों के लिए वीआईपी नंबरों की चाहत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

VIP Number: चंडीगढ़ में वाहनों के लिए वीआईपी नंबरों (VIP Numbers) की चाहत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हाल ही में आयोजित ई-नीलामी (E-Auction) में प्रतिष्ठित नंबर 0001 ने इतने लाख रुपये की रिकॉर्ड तोड़ बोली हासिल की, जो अब तक का सबसे महंगा नंबर बन गया है। इस कीमत में एक टोयोटा फॉर्च्यूनर (Fortuner) या दो महिंद्रा थार गाड़ियां खरीदी जा सकती हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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आपको बता दें कि हाल ही में आयोजित ई-नीलामी में वीआईपी नंबर CH01DA0001 की बोली ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। यह नंबर 36.42 लाख रुपये में बिका, जो अब तक का सबसे महंगा पंजीकरण नंबर बन गया है।

नई सीरीज CH01-DA की शुरुआत

चंडीगढ़ प्रशासन (Chandigarh Administration) ने वाहनों के लिए नई सीरीज CH01-DA शुरू की, जिसमें 0001 से 9999 तक के नंबर शामिल हैं। इसके साथ ही पुरानी सीरीज के बचे हुए फैंसी नंबरों को भी नीलाम किया गया। 19 से 22 अगस्त 2025 तक चले इस विशेष अभियान में RLA ने टॉप-7 नंबरों की बिक्री से ही 1.28 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की। यह नीलामी फैंसी और मनपसंद नंबरों के शौकीनों के लिए थी, जिसमें सैकड़ों नंबरों पर बोली लगी।

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टॉप नंबरों की रिकॉर्ड बोली

नीलामी में नंबर 0001 ने 36.43 लाख रुपये की बोली के साथ सुर्खियां बटोरीं, जो इसके 50,000 रुपये के रिजर्व प्राइस से कई गुना अधिक है। इसके बाद नंबर 0003 को 17.84 लाख रुपये और 0009 को 16.82 लाख रुपये में नीलाम किया गया। अन्य प्रमुख नंबरों में 0005 (16.51 लाख), 0007 (16.50 लाख), 0002 (13.80 लाख), और 9999 (10.25 लाख) शामिल हैं। यह नीलामी मई 2025 में CH01-CZ सीरीज के 0001 नंबर के लिए लगी 31 लाख रुपये की पिछली बोली को पार कर गई।

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प्रशासन के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत

चंडीगढ़ परिवहन विभाग के निदेशक प्रद्युम्न सिंह (Pradyuman Singh) ने कहा कि इस नीलामी ने 577 नंबरों की बिक्री के साथ 4.08 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो केंद्र शासित प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कमाई है। यह राशि पिछले रिकॉर्ड से 1.1 करोड़ रुपये अधिक है। सात शीर्ष नंबरों ने अकेले 1.28 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया। आगामी फेस्टिवल सीजन में वाहन पंजीकरण बढ़ने की उम्मीद है, जिससे फैंसी नंबरों की मांग और बढ़ सकती है।