UPSC Result: इन UPSC टॉपर्स की कहानियां आपका दिल छू जाएंगी।
UPSC Result: यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam) देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता की ऊंचाइयों तक कुछ ही पहुंच पाते हैं। इस बार की उपलब्धियां सिर्फ रैंक (Rank) तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इन सफल युवाओं (Youth) की कहानियों ने भी लोगों का दिल छू लिया। कोई किसान की बेटी है तो कोई लंबे समय से बेरोजगार था। UPSC ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2024 का अंतिम रिजल्ट जारी किया। बता दें कि प्रयागराज की शक्ति दुबे (Shakti Dubey) ने सभी को पीछे छोड़ते हुए रैंक 1 हासिल की है।

आपको बता दें कि UPSC ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा 2024 का अंतिम रिजल्ट जारी किया। इसमें अभिनव शर्मा ने 130वीं, भमोरा के रुद्रपुर की सृष्टि ने 145वीं, फरीदपुर के आयुष जायसवाल ने 178वीं, अंजलि ने 702वीं और तनुज कुमार ने 996वीं रैंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। इन सभी का मानना है कि इस सफलता के पीछे कड़ी मेहनत और सच्ची लगन से पढ़ाई है।
कल्पना रावत को मिली 76वीं रैंक

बरेली के बीसलपुर के मोहल्ला पटेल नगर निवासी आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की पत्नी कल्पना रावत (Kalpana Rawat) ने UPSC में सफलता प्राप्त कर ली है। उन्होंने यह सफलता तीसरे प्रयास में प्राप्त की है। उनकी 76वीं रैंक आई है। कल्पना रावत हरियाणा के जिला सोनीपत के गांव जाजल की रहने वाली हैं। उनका विवाह 6 दिसंबर 2024 को सूर्य प्रताप सिंह के साथ हुआ था। सूर्य प्रताप सिंह आजकल बिहार के जिला रोहतास सासाराम की तहसील डेहरी ओनसोन में बतौर प्रशिक्षु एसडीएम तैनात हैं।
कल्पना रावत (Kalpana Rawat) ने अपने पति सूर्य प्रताप के साथ रहकर ही एग्जाम की तैयारी की थी। इसमें सूर्य प्रताप ने पत्नी का बहुत सहयोग किया। उन्होंने आईएएस की परीक्षा साल 2024 में दी थी। मार्च 2025 में उनका इंटरव्यू हुआ था। मंगलवार को रिजल्ट आ गया है। कल्पना ने 76वीं रैंक हासिल की है। कल्पना ने पढ़ाई दिल्ली एनसीआर में रहकर की थी। कल्पना की सक्सेज से परिवार में खुशी का माहौल है। बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। कल्पना के ससुर बाबूराम गंगवार ने बहू की सफलता पर मिठाई बांटी। बता दें कि वर्तमान में कल्पना का ससुराल पक्ष बरेली में रुहेलखंड विवि के सामने नौलकंठ कॉलोनी में रहते हैं। कल्पना के पिता किशन कुमार रावत ठेकेदार हैं। मां अनिल देवी घरेलू महिला हैं। भाई सुमित सिंह दिल्ली हाईकोर्ट में वकील हैं।
पिता इंस्पेक्टर, चाचा कांस्टेबल अब बेटा अभिनव बनेगा IPS

UPSC एग्जाम में अभिनव शर्मा (Abhinav Sharma) ने अपने चौथे प्रयास में 130 ऑल इंडिया रैंक प्राप्त की है। यूपी के बदायूं के दातागंज के गांव पढ़ेली के रहने वाले अभिनव बरेली के बदायूं रोड स्थित साउथ सिटी में माता शालिनी शर्मा के साथ रहकर UPSC की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता रमेश चंद्र शर्मा देहली गेट, मेरठ में प्रभारी निरीक्षक हैं। इसके साथ ही चाचा अवधेश कांस्टेबल हैं।
अभिनव ने कहा कि अपनी पिता की पोस्टिंग के कारण प्रारंभिक शिक्षा मुरादाबाद से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी पटना से सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक की। उन्होंने ने कहा कि साल 2020 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं हुए और इसके बाद उन्होंने प्रतियोगिता की तैयारी करना शुरू की और 2021 में वह प्री क्लियर नहीं कर सके। उन्होंने दोबारा प्रयास करना शुरू किया और 2022 में सुधार करते हुए इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन सफल नहीं हो सके। 2023 में सफल होकर इंडियन पोस्टल सर्विस में जगह बनाई, लेकिन इससे भी उनका मन नहीं लगा। उन्होंने आईपीएस बनने के अपने सपने को सच करने के लिए चौथे बार में हासिल किया और 26 साल की उम्र में ही सफलता को अपने कदमों में ला रखा।
सैमसंग कंपनी की छोड़ी नौकरी, आयुष ने सिविल सर्विसेज में बनाई जगह

फरीदपुर निवासी आयुष जायसवाल (Ayush Jaiswal) ने नोएडा में सैमसंग में 24 लाख सालाना पैकेज की नौकरी को छोड़कर सिविल परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 178वीं रैंक प्राप्त की है। फरीदपुर के मोहल्ला कानूनगोयान के रहने वाले आयुष के पिता अमन जायसवाल कपड़ा व्यापारी है। अमन ने कहा कि पिता उन्हें आईएएस अधिकारी के रूप में देखना चाहते थे।
आयुष (Ayush) ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बरेली से ही पूरी की है। पिता ने आयुष का एडमिशन जयपुर के कॉलेज में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कराने के लिए कराया। इसके बाद 2021 में पढ़ाई पूरी करने के बाद ही आयुष का चयन सैमसंग कंपनी में 24 लाख के सालाना पैकेज के साथ नोएड़ा में हुआ। 1 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड दी। इसके बाद वह दिल्ली में ही सेल्फ स्टडी करते हुए तैयारी शुरू कर दी और उन्होंने पहले प्रयास में 707वीं रैंक हासिल कर IRS के पद मिला। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने 10 महीने की छुट्टी लेकर दोबारा से प्रयास कर अपने IAS बनने के सपने को पूरा करने के लिए परिवार से बात की और करीब एक साल बाद ही उन्होंने अब 178वीं रैंक हासिल करने में सफलता प्राप्त की।
अंजलि को तीसरी बार में मिली सफलता

सदर बाजार कैंट की अंजलि (Anjali) ने UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में 702वीं रैंक प्राप्त की है। अंजलि की सक्सेज से पूरा परिवार बहुत खुश है। खास बात यह है कि विज्ञान सब्जेक्ट से पोस्ट ग्रेजुएट अंजलि ने दर्शनशास्त्र विषय से परीक्षा पास की है। अंजलि के पिता ओमप्रकाश रेवेन्यू डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। अंजलि अपनी सफलता का श्रेय परिवार और दोस्तों को देती हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका तीसरा प्रयास था। इसके पहले 2 प्रयास में वह शुरुआती परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थीं। लेकिन इससे वह निराश नहीं हुई बल्कि और मेहनत, लगन से परीक्षा की तैयारी में जुटी रहीं। तीसरे प्रयास में उनको सक्सेज मिली और 702 रैंक हासिल की है।
तनुज को 2021 में नौकरी न मिलने से थे परेशान, इस बार बाजी मारी

अशरफ खां छावनी में रहने वाले तनुज कुमार (Tanuj Kumar) ने 996वीं रैंक प्राप्त की है। तनुज ने 2021 में एक बार परीक्षा में सफल होकर 675वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें सर्विस अलॉट नहीं हो पाई थी। तनुज वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार के भी भतीजे है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में सफल न होने के बाद भी नौकरी न मिलने से परेशान रहे। इसके बाद अधिकारी बनने की चाहत और सपने के कारण उन्होंने दोबारा प्रयास शुरू किया। इसके लिए उन्होंने लगातार लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करना शुरू किया। उन्होंने किताबों तक ही खुद को सीमित कर लिया।
उन्होंने कहा कि मंगलवार को रिजल्ट में उत्तीर्ण होने पर पिछले सभी त्यागों को खुशी में बदल दिया। उनके पिता दिवंगत तरुण कुमार सुशीला गिरीश स्कूल का संचालन करते थे। वहीं अब माता प्रीति सक्सेना उसी विद्यालय में प्रधानाचार्य हैं।
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35 लाख के पैकेज से सृजित ना थे खुश, अब बने अधिकारी

शाहजहांपुर के रहने वाले सृजित कुमार (Srijit Kumar) अपने सपने को पूरा करने के लिए 35 लाख की नौकरी को छोड़कर तैयारी की और उसका फल उन्हें परीक्षा में 277वीं रैंक हासिल की है। सृजित के पिता सुभाष चंद्र गंगवार मुरादाबाद में एसपी यातायात के पद पर कार्य कर रहें है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई शाहजहांपुर से पूरी की है। 12वीं के बाद उन्होंने कानपुर आईआईटी से कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया। इस बीच पिता के साथ 2 साल बरेली में बिताए।
साल 2021 में पढ़ाई खत्म करते ही बेंगलुरु की एक कंपनी में 35 लाख के पैकेज पर नौकरी की चयन किया गया। बेंगलुरु में 2024 तक नौकरी करने के बाद भी मन नहीं माना। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला लिया और नौकरी छोडकर घर वापस लौट आए। पहले ही प्रयास में 277 वीं रैंक प्राप्त कर नाम रोशन कर दिया।
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किसान की बेटी सृष्टि सिंह बनेगी IAS अधिकारी

बरेली जिले के किसान पिता ओंकार सिंह की बेटी सृष्टि सिंह (Srishti Singh) के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। 6 साल की कड़ी मेहनत के बाद उसने इस चुनौती को UPSC की परीक्षा में अपनी सफलता से पूरा किया है। बता दें कि मंगलवार को आए यूपीएससी के रिजल्ट में भमौरा के रुद्रपुर गांव की इस बेटी ने 145वीं रैंक प्राप्त की। सृष्टि ने कहा है कि उसकी आकांक्षा थी कि वह आईएएस बने। करीब 27 साल की सृष्टि की इस आकांक्षा को पूरा करने में उसके माता-पिता का पूरा सहयोग रहा।
सृष्टि सिंह (Srishti Singh) ने कहा कि इस रैंक के साथ आईएएस मिलने की पूरी उम्मीद है। और बिना कोचिंग अपनी तैयारी UPSC परीक्षा के लिए की। इसके लिए केवल यूट्यूब के वीडियो ही सहारा बने। उनके आईएएस में चयन की खबर जैसे ही गांव पहुंची। पूरा परिवार और गांव खुशियां मनाने लगा। पिता ने खुद बेटी को मिठाई खिलाकर बधाई दी। सृष्टि ने कहा कि उनके पिता गांव में ही खेती किसानी कर घर चलाते है। शुरुआत से ही घर की खराब हालत देख परिवार के लिए कुछ बड़ा करने की चाह थी। 12 वीं पास करने के बाद एक दिन उनको उनकी सहेली ने बोला था कि मेरा भाई एक दिन आईएएस बनकर गांव आएगा। इस बात ने सृष्टि को आईएएस के रूप में देखने के लिए प्रेरणा दी।
सृष्टि के मुताबिक साल 2018 में बीएससी की पढ़ाई पूरी की। अगले ही साल से UPSC की तैयारी शुरू कर दी। 2019 में अपना पहला प्रयास किया, लेकिन इसमें वह विफल रहीं। इसके बाद एमएससी की पढ़ाई के साथ सिविल सर्विस की तैयारी जारी रखी। 2023 में दोबारा से परीक्षा में बैठी। इस बार फिर से निराशा ही हाथ लगी। तीसरे प्रयास में सृष्टि को आईएएस में चयनित होने में सक्सेज प्राप्त की।
