UP News: उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित करते हुए रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना में देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में राज्य में अब तक 5 लाख से अधिक सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सोलर एनर्जी में रिकॉर्ड प्रदर्शन
प्रदेश में कुल 5,00,115 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 1,696.68 मेगावाट की क्षमता विकसित हुई है। इस योजना के तहत बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया और सरकार ने तेजी से स्वीकृति और स्थापना सुनिश्चित की। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी भी दी गई, जिससे लोगों को इस योजना से जुड़ने में आसानी हुई।
मुफ्त बिजली और पर्यावरण को फायदा
रूफटॉप सोलर के बढ़ते उपयोग से प्रदेश में हर दिन लगभग ₹5 करोड़ की मुफ्त बिजली उत्पन्न हो रही है। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। यह पहल न केवल बिजली खर्च कम कर रही है बल्कि ग्रीन एनर्जी को भी मजबूती दे रही है।
रोजगार और उद्योग को बढ़ावा
इस योजना का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में लगभग 5,000 कंपनियों के माध्यम से 65,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिले हैं। सोलर सेक्टर के विस्तार से एक नया इंडस्ट्री इकोसिस्टम भी विकसित हो रहा है।
स्थापना की रफ्तार में नया रिकॉर्ड
अप्रैल 2026 में मात्र 30 दिनों के अंदर 51,882 सोलर संयंत्र स्थापित कर उत्तर प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रतिदिन औसतन 1,729 संयंत्र लगाए गए, जो अब तक की सबसे तेज गति है। इस प्रदर्शन के आधार पर राज्य ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।
जमीन की बचत और बेहतर उपयोग
रूफटॉप सोलर संयंत्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें छतों पर लगाया जाता है, जिससे जमीन की बचत होती है। इस पहल के जरिए लगभग 6,500 एकड़ जमीन को संरक्षित किया गया है, जिसे कृषि और अन्य कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश का यह प्रदर्शन ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। रूफटॉप सोलर के जरिए राज्य न केवल बिजली उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी नई दिशा दे रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
