Punjab News: पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए दिड़बा में एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने की, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और डिफेंस कमेटियों के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
केवल सरकार नहीं, पूरे समाज को निभानी होगी भूमिका
बैठक को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि नशा मुक्त पंजाब का सपना केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए गांवों के सरपंचों, पंचों, सामाजिक संगठनों, डिफेंस कमेटियों और युवाओं को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि नशा तस्करी और बिक्री से जुड़ी किसी भी जानकारी को तुरंत प्रशासन और पुलिस तक पहुंचाया जाए।
नशा तस्करी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा
सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए होने वाली नशा तस्करी को रोकने के लिए पुलिस को आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने और तस्करों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
12 हजार से अधिक शिकायतें, 60 हजार से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई
‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत अब तक नशों से संबंधित 12 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा 2,500 से अधिक नशा पीड़ित व्यक्तियों की जानकारी भी प्रशासन तक पहुंची है। अभियान के दौरान 60 हजार से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है।
90 हजार से अधिक नशा प्रभावित लोगों का इलाज
सरकार केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशा पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब तक 90 हजार से अधिक नशा प्रभावित लोगों का इलाज करवाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए गए हैं।
खेलों को बनाया जा रहा नशे के खिलाफ हथियार
हरपाल सिंह चीमा ने युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि खेल नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी माध्यम हैं। इसी उद्देश्य से पंजाब के विभिन्न गांवों में आधुनिक खेल स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। दिड़बा क्षेत्र में भी करोड़ों रुपये की लागत से खेल अवसंरचना तैयार की जा रही है, जिससे युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
नशा मुक्त और विकसित पंजाब की ओर
बैठक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में नशा विरोधी अभियानों की समीक्षा की गई और उन्हें और प्रभावी बनाने के सुझावों पर चर्चा हुई। साथ ही डिफेंस कमेटियों के सदस्यों को पहचान पत्र भी वितरित किए गए। सरकार का मानना है कि सामाजिक सहयोग, कड़ी कानूनी कार्रवाई, उपचार और पुनर्वास के संयुक्त प्रयासों से पंजाब को नशे की समस्या से मुक्त कर विकास और प्रगति की नई दिशा दी जा सकती है।
