UP News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डिजिटल गवर्नेंस को नई गति मिली है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परिवहन विभाग है, जहां तकनीक आधारित सुधारों ने वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, कर भुगतान और अन्य सेवाओं को पहले से अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बना दिया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब लाखों नागरिक घर बैठे परिवहन सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे आरटीओ कार्यालयों पर निर्भरता कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
5.30 करोड़ से अधिक वाहनों का डिजिटल प्रबंधन
परिवहन विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में 5 करोड़ 30 लाख 25 हजार 689 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें:
- 34 लाख 76 हजार 928 वाणिज्यिक वाहन
- 4 करोड़ 95 लाख 48 हजार 761 निजी वाहन
शामिल हैं।
इतने बड़े वाहन नेटवर्क का प्रबंधन VAHAN और SARATHI पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे रिकॉर्ड स्तर पर सेवाओं का संचालन संभव हो पाया है।
वाहन पंजीकरण में लखनऊ सबसे आगे
वाहन पंजीकरण के मामले में लखनऊ का ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है।
सर्वाधिक वाहन पंजीकरण वाले जिले
| जिला | पंजीकृत वाहन |
|---|---|
| लखनऊ | 32.49 लाख |
| प्रयागराज | 32.49 लाख |
| कानपुर नगर | 19.79 लाख |
| आगरा | 16.92 लाख |
| वाराणसी | 16.70 लाख |
ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में परिवहन सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और डिजिटल व्यवस्था इसकी रीढ़ बन चुकी है।
2.99 करोड़ से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी
उत्तर प्रदेश में अब तक 2.99 करोड़ से अधिक नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।
सर्वाधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने वाले आरटीओ
| आरटीओ | लाइसेंस |
|---|---|
| लखनऊ | 13.66 लाख |
| गाजियाबाद | 13.11 लाख |
| मेरठ | 10.58 लाख |
| कानपुर नगर | 10.51 लाख |
| प्रयागराज | 10.16 लाख |
वहीं प्रदेश में अब तक 29.05 लाख ट्रांसपोर्ट ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी किए जा चुके हैं। इस श्रेणी में प्रयागराज, कानपुर नगर, गोरखपुर, जौनपुर और आजमगढ़ अग्रणी रहे हैं।
49 सेवाएं हुईं पूरी तरह ऑनलाइन
योगी सरकार ने परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने और नागरिकों को बेहतर सुविधा देने के लिए 49 सेवाओं को फेसलेस और कॉन्टैक्टलेस मोड में उपलब्ध कराया है।
इन सेवाओं का लाभ अब नागरिक:
- घर बैठे ऑनलाइन आवेदन करके
- बिना आरटीओ कार्यालय जाए
- कम समय में
प्राप्त कर सकते हैं।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता
परिवहन विभाग का मानना है कि फेसलेस प्रणाली के कारण:
- समय की बचत हुई है
- पारदर्शिता बढ़ी है
- मानव हस्तक्षेप कम हुआ है
- सेवाओं की गति तेज हुई है
- भ्रष्टाचार की संभावनाएं घटी हैं
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के अनुसार विभाग का लक्ष्य नागरिकों को कम समय में अधिक सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना है और डिजिटल गवर्नेंस इस दिशा में बड़ी उपलब्धि साबित हुई है।
स्मार्ट और नागरिक केंद्रित परिवहन व्यवस्था की ओर यूपी
प्रदेश सरकार की ‘डिजिटल उत्तर प्रदेश’ परिकल्पना का प्रभाव परिवहन विभाग में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े करोड़ों मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण यह साबित करता है कि तकनीक के जरिए प्रशासनिक दक्षता को नई ऊंचाई मिली है।
योगी सरकार का लक्ष्य परिवहन सेवाओं को और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और नागरिक केंद्रित बनाना है, ताकि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुगम यातायात व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों को और मजबूती मिल सके।
