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UP News: Yogi Adityanath के नेतृत्व में विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित, महिला सशक्तीकरण पर विशेष सत्र संपन्न

दिल्ली NCR
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UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला सशक्तीकरण को लेकर आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र चर्चा और राजनीतिक बहस के बीच संपन्न हुआ। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का विरोध करने वाले दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया। सत्र के अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह सत्र महिलाओं के अधिकार, भागीदारी और सशक्तिकरण के मुद्दों को लेकर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री का विपक्ष पर तीखा हमला

सत्र के दौरान Yogi Adityanath ने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन मजहबी आधार पर आरक्षण का विरोध करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की राजनीति देश के हित में नहीं है।

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नारी शक्ति वंदन विधेयक पर विवाद

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों में बाधा डालने की कोशिश की है। उनका कहना था कि महिलाओं को नीति-निर्धारण और निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, और इसी उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने मजहबी आरक्षण का मुद्दा उठाकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास किया।

1947 के विभाजन का जिक्र

सीएम योगी ने अपने संबोधन में 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि देश ऐसी परिस्थितियों को दोबारा नहीं देखना चाहता। उन्होंने कहा कि हर जिम्मेदार राजनीतिक दल का कर्तव्य है कि वह देश की एकता और अखंडता को बनाए रखे। भाजपा इस दिशा में अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेगी।

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महिला सशक्तीकरण पर जोर

सत्र के दौरान यह बात भी सामने आई कि संविधान में लैंगिक समानता की स्पष्ट अवधारणा है, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। सरकार का मानना है कि महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्रों में और अधिक अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि वे देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

यह विशेष सत्र केवल एक राजनीतिक बहस नहीं था, बल्कि महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी था। निंदा प्रस्ताव के पारित होने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इस दिशा में और ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद की जा रही है।