UP News: होली का पर्व गोरखपुर में हर साल भक्ति, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के रंगों से मनाया जाता है। इस बार इसे खास बनाने वाले हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में भगवान नृसिंह की शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे।
🏛️ घंटाघर से शुरू होगी रंगभरी शोभायात्रा
शोभायात्रा श्री होलिकोत्सव समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बैनर तले सुबह घंटाघर से निकलती है। इस परंपरा का उद्देश्य भक्ति की शक्ति के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश देना है। दशकों से यह शोभायात्रा गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में होती रही है।
🙏 सामाजिक समरसता का संदेश
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ दशकों से सभी भेदभाव भूलकर लोगों को एकजुट करने और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने के लिए शोभायात्रा में शामिल होते रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान 2020-21 में शोभायात्रा में वे शामिल नहीं हुए थे, लेकिन 2022 से फिर से इसका नेतृत्व कर रहे हैं।
🕉️ शोभायात्रा का ऐतिहासिक महत्व
भगवान नृसिंह रंगोत्सव की शुरुआत 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने की थी। इसका उद्देश्य होली के अवसर पर समाज को एकजुट करना था। गोरक्षपीठ से इसका गहरा नाता जुड़ गया और महंत अवेद्यनाथ के समय से यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न हिस्सा बन गया।
1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का प्रमुख पर्व बना दिया। अब इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली जैसी है और लोग खासतौर पर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली शोभायात्रा का इंतजार करते हैं।
🚩 शोभायात्रा की विशेषताएँ
- शोभायात्रा लगभग 5 किलोमीटर तय करती है।
- रथ पर सवार गोरक्षपीठाधीश्वर रंगों में सराबोर होकर सभी को शुभकामनाएँ देते हैं।
- पथ नियोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाता है।
🎶 होलिकादहन और फाग गीत
रंगपर्व की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन या सम्मत की राख से तिलक लगाने के साथ होगी। मंदिर के प्रधान पुजारी और अन्य साधु-संत भी रंगोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर फाग गीत गाए जाएंगे और दोपहर में होली मिलन समारोह का आयोजन होगा। गोरखपुर का यह रंगोत्सव भक्ति, सामाजिक समरसता और संस्कृति का प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में होने वाली शोभायात्रा इसे और भी खास बना देती है। यह परंपरा लोगों में भाईचारे और उत्सव की उमंग को बढ़ाती है।
