पशुपालकों को मिलेगा बड़ा फायदा
Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने पशुपालकों (Cattle Breeders) के लिए पशु नस्ल सुधार योजना शुरू की है, जो उच्च नस्ल की बछड़ियों के जन्म के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत 75 प्रतिशत अनुदान पर कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा दी जा रही है, जिसमें पशुपालकों को मात्र 70 रुपये खर्च करने होंगे। इस साल पूरे राज्य में 10 लाख पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें सीकर जिले में पहले चरण में 4,300 पशुओं को शामिल किया गया है।

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र कृष्ण काला (Dr. Rajendra Krishna Kala) ने कहा कि इस योजना में पशुपालक 280 रुपये कीमत वाले कृत्रिम गर्भाधान टीके को केवल 70 रुपये में प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर उपलब्ध है। प्रथम चरण में 1.60 लाख टीके खरीदे जा चुके हैं, और सीकर जिले को 4,300 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है। निजी पशुचिकित्सक इस तरह के टीकों के लिए 500 से 700 रुपये वसूलते हैं, लेकिन सरकारी अनुदान से पशुपालकों को सस्ती दरों पर यह सुविधा मिल रही है।
गोवंश और भैंस की नस्ल सुधार पर जोर
पशुपालन विभाग, सीकर के गोपालन प्रभारी डॉ. दिनेश नहरा ने कहा कि योजना में गोवंश की नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें देशी नस्लों गिर और थारपारकर, विदेशी नस्लों जर्सी और होलिस्टन, तथा भैंस की मुर्रा नस्ल शामिल हैं। गिर और थारपारकर गायें एक ब्यांत में 4,500 लीटर तक दूध देती हैं, जबकि जर्सी और होलिस्टन नस्लें 6 हजार लीटर तक दूध उत्पादन करती हैं। यह योजना दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में वृद्धि करने के लिए महत्वपूर्ण है।
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सॉर्टेड सेमेन से केवल बछड़ी का जन्म
योजना में उपयोग होने वाले कृत्रिम गर्भाधान टीके नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से तमिलनाडु के चेन्नई प्लांट से सप्लाई किए जा रहे हैं। ये टीके विशेषज्ञों की निगरानी में सॉर्टेड हैं, जिससे 90 प्रतिशत संभावना के साथ केवल मादा पशु (बछड़ी) का जन्म होता है। यह तकनीक पशुपालकों को उच्च दूध उत्पादन वाली मादा पशुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करेगी।
भारत पशुधन ऐप से पारदर्शी निगरानी
पशुपालन विभाग ने टीकाकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और दुरुपयोग रोकने के लिए भारत पशुधन ऐप विकसित किया है। पशुचिकित्सकों को टीकाकरण के बाद रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य है। टीकाकरण के ढाई महीने बाद गर्भ परीक्षण और नौ महीने बाद बछड़ी के जन्म की जानकारी भी ऐप पर दर्ज की जाएगी। यह व्यवस्था योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी को सुनिश्चित करेगी।
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पशुपालकों के लिए लाभकारी पहल
राजस्थान सरकार की यह योजना पशुपालकों के लिए एक बड़ी सौगात है, जो न केवल उनकी आय बढ़ाएगी, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि करेगी। उच्च नस्ल की बछड़ियों के जन्म से पशुपालक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे। सरकार का लक्ष्य इस योजना को पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करना है, जिससे पशुपालन क्षेत्र में क्रांति लाई जा सके।
