Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से नया टैरिफ बम फोड़ दिया है।
Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने एक बार फिर से नया टैरिफ बम फोड़ दिया है। बता दें कि फार्मा और फर्नीचर सेक्टर पर भारी शुल्क लगाने की घोषणा के बाद भारत के शेयर बाजार (Stock Market) में गिरावट आई है और निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है। ट्रंप ने फार्मा (Pharma) उत्पादों पर 100 प्रतिशत और फर्नीचर पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है, जिससे भारतीय कंपनियों (Indian Companies) के अमेरिका में कारोबार को तगड़ा झटका लगने की आशंका है। इस ऐलान के बाद न केवल दवा कंपनियों के शेयर गिरे, बल्कि फर्नीचर एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों में भी हड़कंप मच गया है। पढ़िए पूरी डिटेल्स…

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आपको बता दें कि 25 सितंबर की देर रात डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ नए सेक्टर पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया। फार्मा पर 100 प्रतिशत, फर्नीचर पर 50 प्रतिशत और हैवी ट्रक बनाने वाली कंपनियों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जो 1 अक्टूबर से लागू होंगे।
टैरिफ का शेयर बाजार पर सीधा असर
ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ का असर मार्केट में लिस्टेड कुछ फर्नीचर कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दे रहा है। नीलकमल के शेयर 1 प्रतिशत टूटकर 1500 के करीब कारोबार कर रहे हैं। वहीं गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट के शेयरों में 1.54 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा, कैरीसिल के शेयर 9.5 प्रतिशत तक गिरकर 768.15 रुपये पर पहुंच गए।

फार्मा सेक्टर को बड़ा झटका, निवेशकों में चिंता
ट्रंप द्वारा फार्मा उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। सन फार्मा, नैट्को, अरविंदो, लुपिन, बायोकॉन जैसी कंपनियों का अमेरिका में बड़ा कारोबार है और राजस्व का बड़ा हिस्सा वहीं से आता है। इस कदम से फार्मा सेक्टर में अफरा-तफरी मच गई है और निवेशकों की नजर इन कंपनियों के प्रदर्शन पर टिक गई है।
जेनरिक दवा कंपनियां हो सकती हैं सुरक्षित
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप की यह नीति डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, लुपिन, और अरविंदो फार्मा पर ज्यादा असर नहीं डालेगी, क्योंकि ये कंपनियां जेनरिक दवाएं बनाती हैं और कई के प्लांट अमेरिका में मौजूद हैं। बायोकॉन ने हाल ही में अमेरिका में एक नया संयंत्र शुरू किया है, जिससे यह टैरिफ के असर से बच सकती है। लेकिन, सन फार्मा पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

फर्नीचर एक्सपोर्ट सेक्टर को 50% टैरिफ से तगड़ा नुकसान
भारत फर्नीचर का बड़ा निर्यातक देश है और अमेरिका इसके प्रमुख बाजारों में से एक है। 2022-23 में भारत का फर्नीचर एक्सपोर्ट मार्केट करीब 5 अरब डॉलर का था। अब ट्रंप द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद, भारत के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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अमेरिका को कितना फर्नीचर भेजता है भारत?
ट्रेडइकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत ने अमेरिका को 1.14 अरब डॉलर (करीब 10 हजार करोड़ रुपये) का फर्नीचर, लाइटिंग, और प्रीफैब्रिकेटेड बिल्डिंग उत्पादों का निर्यात किया। वहीं 2023 में 1.07 अरब डॉलर के फर्नीचर और संबंधित उत्पादों की सप्लाई की गई थी।
कौन-कौन सी भारतीय कंपनियां होंगी प्रभावित?
Nilkamal Ltd: अमेरिका को करीब 55-60 करोड़ रुपये का प्लास्टिक फर्नीचर भेजती है।
Godrej Interio: अमेरिका में ऑफिस और होम फर्नीचर के लिए मशहूर, लेकिन सटीक एक्सपोर्ट डेटा सार्वजनिक नहीं है।
Carysil: अमेरिका से कंपनी की आय का 21.5 प्रतिशत हिस्सा आता है। यह सिंक और किचन एप्लायंसेज बनाती है।
Featherlite Industries: ऑफिस फर्नीचर के बी2बी एक्सपोर्ट में सक्रिय।
Sheela Foam (Sleepwell): अमेरिका को गद्दे और बेडिंग एक्सपोर्ट करती है।
Kurlon Enterprises, Furniture Roots, Durian, Fashion Interior जैसी कई छोटी कंपनियां भी अमेरिका को बड़े पैमाने पर फर्नीचर सप्लाई करती हैं।
भारत को क्या करना चाहिए?
फर्नीचर पर टैरिफ से भारत के प्रोडक्ट्स अमेरिका में महंगे हो सकते हैं, जिस कारण भारत का अमेरिका का एक्सपोर्ट कम हो सकता है। ऐसे में भारत को नए मार्केट की तलाश करनी चाहिए, जिससे टैरिफ का असर भारत पर कम पड़े।
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क्या आगे और बढ़ेगा तनाव?
विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ को हथियार बनाया गया है। यदि ट्रंप 2024 में फिर से राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो यह नीति और अधिक सख्त हो सकती है, जिससे भारत जैसे साझेदार देशों पर आर्थिक असर गहराने की आशंका है।
