Supertech EcoVillage-2: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसायटी सुपरटेक इकोविलेज-2 प्रोजेक्ट के हज़ारों परेशान और पीड़ित फ्लैट खरीदारों ने एक सुर में स्पष्ट किया है कि अब उन्हें केवल एक ही संस्था पर भरोसा है — NBCC (India) Ltd., जो एक सरकारी निर्माण एजेंसी है। खरीदारों का कहना है कि Supertech और उसकी सहयोगी कंपनी Apex Heights Private Limited पर उनका विश्वास पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वे चाहते हैं कि यह अधूरी पड़ी परियोजना NBCC को सौंपी जाए ताकि वर्षों से लंबित उनके सपनों का घर उन्हें मिल सके।
🔷 NCLAT आदेश लागू करने की माँग
EcoVillage 2 Welfare Association ने दोहराया कि NCLAT द्वारा 12 दिसंबर 2024 को दिया गया आदेश, जिसमें NBCC को प्रोजेक्ट ट्रांसफर करने का स्पष्ट निर्देश था, उसे तत्काल लागू किया जाए।
बायर्स का कहना है कि इस आदेश के 8 महीने बाद भी क्रियान्वयन नहीं होना न्याय की अवहेलना है और हज़ारों परिवारों के साथ अन्याय।
🔷 15 वर्षों से अधूरी उम्मीदें और टूटता भरोसा
EcoVillage2 परियोजना की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। ज़्यादातर बायर्स मध्यमवर्गीय परिवार हैं, जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी इस प्रोजेक्ट में लगा दी।
श्री मोहन लाल सिन्हा, अध्यक्ष, EcoVillage2 Welfare Association, बताते हैं:
“मैंने 2012 में फ्लैट बुक किया था और 2015 में डिलीवरी होनी थी। आज 2025 चल रहा है – मैं अब तक किराया और EMI दोनों दे रहा हूँ। मैं अकेला नहीं हूं, हज़ारों लोग इसी पीड़ा से गुज़र रहे हैं।”
🔷 Subvention Scheme से बायर्स से धोखा
Supertech ने बायर्स को Subvention Scheme के तहत वादा किया था कि पजेशन तक प्री-EMI वह देगा, लेकिन कुछ महीनों बाद इसे बंद कर दिया गया।
मिसेज लता टैक, वाइस प्रेसिडेंट, एसोसिएशन, भी इसका शिकार रहीं। आज बैंक 16% तक ब्याज वसूल रहे हैं।
“ऐसे धोखे के बाद अब किसी प्राइवेट बिल्डर पर भरोसा नहीं किया जा सकता – सिर्फ NBCC ही हमें राहत दे सकता है।”
🔷 Monitoring Team की स्पष्ट राय – “NBCC ही एकमात्र विकल्प”
Association की Monitoring Team और एक्टिव मेंबर्स ने Supertech की किसी सहयोगी से निर्माण कार्य कराना खरीदारों के हित में नहीं माना।
Association ने 3000+ बायर्स से सीधा संवाद किया, जिसमें 95% से अधिक बायर्स ने NBCC को ही अंतिम उम्मीद बताया।
🔷 Apex Heights क्यों है अविश्वसनीय?
खरीदारों ने ठोस तथ्यों और आंकड़ों के ज़रिए स्पष्ट किया है कि Apex Heights इस 10,000 करोड़ की परियोजना को पूर्ण करने में पूरी तरह अक्षम है:
Paid-up Capital: ₹45.10 लाख
Net Worth: ₹2.39 करोड़
Cash Balance: ₹2.66 करोड़
देनदारियाँ: ₹700 करोड़ से अधिक
संदिग्ध Receivables: ₹579 करोड़
कोई अनुभव नहीं, कोई सक्रिय निर्माण साइट नहीं
Supertech की ही “बदले नाम की शाखा” — बायर्स का आरोप
“इतनी कमजोर कंपनी से निर्माण कराना अगला Amrapali कांड साबित हो सकता है।”
🔷 करोड़ों की फंडिंग – सिर्फ़ दिखावा
Apex Heights ने करोड़ों की फंडिंग का दावा किया, लेकिन न कोई बैंक गारंटी, न कोई वैध समझौता, न कोई वित्तीय अनुमोदन।
केवल मीडिया और मीटिंग्स में वादों का भ्रम फैलाया गया।
🔷 NBCC क्यों है खरीदारों की पहली पसंद?
NBCC एक सरकारी उपक्रम है, जो मुनाफ़े नहीं, ज़िम्मेदारी से काम करता है
Amrapali और Jaypee जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स सफलतापूर्वक पूरे किए
तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी रूप से सक्षम
सरकार, अदालत और जनता का भरोसा
NCLAT ने 16 प्रोजेक्ट्स NBCC को सौंपे – EcoVillage 2 उनमें प्रमुख
🔷 सुप्रीम कोर्ट में 13 अगस्त को सुनवाई
EcoVillage 2 Welfare Association द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट श्री एम.एल. लाहोटी 13 अगस्त 2025 को खरीदारों की ओर से ज़ोरदार पैरवी करेंगे।
Association को आशा है कि कोर्ट NBCC को तुरंत काम शुरू करने का निर्देश देगा।
🔷 अब और नहीं धोखा – तीन प्रमुख माँगें
EcoVillage2 Welfare Association और बायर्स ने मिलकर तीन स्पष्ट माँगें रखी हैं:
- NCLAT आदेश के अनुसार प्रोजेक्ट NBCC को सौंपा जाए
- Supertech और Apex Heights को पूरी तरह प्रोजेक्ट से बाहर किया जाए
- निर्माण कार्य समयबद्ध और पारदर्शी रूप से दोबारा शुरू किया जाए
“EcoVillage2 के बायर्स अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते। हम सिर्फ न्याय नहीं, उसका त्वरित क्रियान्वयन चाहते हैं।”
