जिसने देश की सेवा की, उसे जीवन भर न्याय का इंतज़ार करना पड़ा- अब मिलेगा उसका हक़।
Armed Forces Tribunal: लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित विधिक संस्था Proactive Legal के अधिवक्ताओं के अथक प्रयासों के फलस्वरूप, पूर्व सैनिक चन्द्र प्रकाश ओझा को 40 वर्षों बाद विकलांगता पेंशन का अधिकार प्राप्त हुआ है।

माननीय सशस्त्र बल अधिकरण, क्षेत्रीय पीठ, लखनऊ ने 5 अगस्त 2025 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट किया कि ओझा की बीमारी (Ischaemic Heart Disease) सेना की सेवा के दौरान उत्पन्न हुई थी, चंद्रपकाश ओझा को इस बीमारी के कारण सेवा से बाहर कर दिया गया था और उन्हें अन्यायपूर्वक विकलांगता पेंशन से भी वंचित कर दिया गया था।
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यह मामला और भी संवेदनशील इसलिए बन गया क्योंकि ओझा के सेवा अभिलेख समयावधि समाप्त होने के कारण नष्ट किये जा चुके थे। इसके बावजूद Proactive Legal की टीम ने ठोस कानूनी तर्कों के साथ ऐसा प्रमाण प्रस्तुत किया कि न्यायालय ने उन्हें 20 प्रतिशत विकलांगता, जिसे नियम अनुसार 50% मानकर पेंशन प्रदान करने का आदेश दिया।
इस प्रकरण में बहस वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार मिश्रा, Proactive Legal के द्वारा की गई।
Proactive Legal के अधिवक्ता चन्दन कुमार पाण्डेय ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “यह केवल एक केस नहीं है, यह देश के उन हजारों पूर्व सैनिकों की आवाज़ है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। न्याय देर से ही सही , लेकिन मिला- यही इस देश की न्याय व्यवस्था की ताक़त है।”
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यह निर्णय उन सभी पूर्व सैनिकों के लिए एक मार्गदर्शक है जो किसी कारणवश पेंशन या अन्य लाभों से वंचित हैं। Proactive Legal पूर्व सैनिकों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के न्यायिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसी ही लड़ाइयां लड़ेगा।
