Supertech: सुपरटेक केस में आज सर्वोच्च न्यायालय ने सभी की अपील सुनने के लिए अगली सुनवाई तक के लिए एनबीसीसी के द्वारा प्रोजेक्ट में काम शुरू किए जाने पर अंतरिम रोक लगाई है। इस फैसले से सुपरटेक के घर खरीदार छणिक व्यथित ज़रूर है लेकिन निराश नहीं है, सुपरटेक के सभी होम बायर्स को पूर्ण विश्वास है के अंत में जीत घर खरीददारों की ही होगी।
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घर खरीदारों की मुख्य न्यायाधीश से प्रार्थना की है एनबीसीसी के द्वारा शुरू किये गए कार्य को न रोका जाये क्योकि सुपरटेक के घर खरीददार 15 साल से त्रस्त है, और अभी तक घर के लिए भटक रहे हैं। घर खरीदार सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रार्थना भी दाखिल चुके कर हैं, जिसका आवेदन सुनील जे मैथ्यू (अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट) द्वारा तैयार किया गया था और मारीश प्रवीर सहाय (एओआर सुप्रीम कोर्ट) द्वारा दायर किया गया था।

गुलशन कुमार बनाम ई-फाइल मामले की स्थिति राम किशोर अरोड़ा, सुपरटेक लिमिटेड के निलंबित निदेशक। और ओ.आर.एस. ई-फाइलिंग नंबर ECSCIN01036642025 दिनांक 25-01-2025 के साथ – डायरी नंबर 47152025 और सुपरटेक इको विलेज 3 वेलफेयर एसोसिएशन ई-फाइलिंग नंबर ECSCIN01036702025 दिनांक 25-01-2025 के साथ डायरी नंबर 47212025 के साथ दायर किया गया है।

घर खरीदारों की मुख्य न्यायधीश से प्रमुख प्रार्थना निम्न है:
- सुपरटेक लिमिटेड के सभी प्रोजेक्ट का कंस्ट्रक्शन और रखरखाव एनबीसीसी को सौंपे जाए।
- घर खरीदारों से बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार ही बची राशि ली जाए, कोई अन्य अतिरिक्त बड़ी हुई राशि की मांग न की जाए।
- सुपरटेक का फॉरेंसिक ऑडिट हो, क्योंकि IRP की रिपोर्ट में भी लगभग 9000 करोड़ की राशि का कोई विवरण नहीं है।
- अथॉरिटी और बैंको के बकाए का भुगतान प्रोजेक्ट के पूरा होने पर या अतिरिक्त फण्ड से ही किया जाये।
घर खरीदारों की प्रार्थना पर जल्दी ही सुनवाई होगी, घर खरीददार अगली सुनवाई पर अपनी व्यथा को माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रखरता से रखेंगे।

ज्ञात रहे सुपरटेक के हजार घर खरीदारों में से बहुतायत अपने घर की कीमत का 95% या लगभग संपूर्ण राशि सुपरटेक को दे चुके हैं और अभी तक घर के लिए भटक रहे हैं सुपरटेक की विभिन्न परियोजना 2010 से शुरू हुई थी जो अभी तक अधूरी है, इनके घर खरीदार चौतरफा परेशान है इनमें ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो घर की ईएमआई भी दे रहे हैं, किराया भी दे रहे हैं, अपने घर की लगभग पूरी रकम चुकाने के बाद भी ये घर खरीदार असहाय और बेघर हैं, जिन को घर मिल गए हैं वो आधी अधूरी बनी सोसायटी में अव्यवस्था और कुप्रबंधन का शिकार है।
घर खरीदारों ने बताया ये हमारी सुप्रीम कोर्ट की प्रार्थना भी होमबायर के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, और हमारी ये लडाई आने वाले पीढ़ियों के अधिकारों का भविष्य में हनन न हो ये सुनिश्चित करेगी। घर खरीदारों ने सभी से अपील की, वे अपने अधिकारों और ताकत का प्रयोग सुपरटेक के 15 वर्षों से पीड़ित घर खरीदारों के पक्ष में करे और इस लड़ाई को लड़ने में घर खरीदारों का सहयोग करें।
