Shani Sade Sati: शनि ग्रह को सभी नवग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है।
Shani Sade Sati: शनि ग्रह को सभी नवग्रहों (Navgrahas) में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। यह हर ढाई साल में एक बार राशि परिवर्तन करता है, जिसकी वजह से इसका गोचर ज्योतिष (Transit Astrology) में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब शनि राशि बदलता है, तो तीन राशियों पर साढ़ेसाती (Sade Saati) और दो राशियों पर ढैय्या लग जाती है। पढ़िए पूरी खबर…

कैसे काम करती है साढ़ेसाती और ढैय्या?
आपको बता दें कि जब शनि किसी राशि में प्रवेश करता है, तो उस राशि के अलावा उससे पहले और बाद वाली राशियों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इसी को साढ़ेसाती कहा जाता है, जिसकी अवधि कुल साढ़े सात साल होती है। वहीं शनि जब किसी राशि से चौथे या आठवें स्थान पर होता है, तो उस पर ढैय्या लगती है, जो ढाई साल तक चलती है। ज्योतिष के अनुसार, जीवन में एक बार हर व्यक्ति को शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का सामना करना पड़ता है।
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इन राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
आने वाले ढाई साल तक कुंभ राशि (Aquarius) पर साढ़ेसाती का असर रहेगा। इसके अलावा, मीन और मेष राशि पर पहले से ही साढ़ेसाती चल रही है। मेष राशि वालों को आगामी साढ़े सात साल तक इसका प्रभाव झेलना होगा, जबकि मीन राशि पर इसका असर अगले पांच साल तक बना रहेगा। वहीं, सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है, जो आने वाले ढाई वर्षों तक बनी रहेगी।
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शनि के प्रभाव से कैसे पाएं राहत?
शनि की साढ़ेसाती (Sade Saati) और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी (Hanuman Ji) की पूजा को सबसे कारगर उपाय माना गया है। मान्यता है कि शनिदेव ने हनुमान जी को वरदान दिया है कि उनके भक्तों पर उनका अशुभ प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे बचने के लिए रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ, श्रीराम और माता सीता का सुमिरन, और हनुमान मंदिर में पूजा करने से राहत मिल सकती है।
Disclaimer: यहां बताई गई सारी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसकी विषय सामग्री का ख़बरी मीडिया हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता है।
