School: क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया का सबसे महंगा स्कूल कैसा होगा?
School: भारत में कई नामी और महंगे स्कूल (Expensive Schools) हैं जिनकी फीस लाखों रुपये तक होती है, लेकिन दुनिया में एक ऐसा स्कूल है जिसकी सालाना फीस (Annual Fees) जानकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं। यह स्कूल सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि एक शाही जीवनशैली और लग्जरी सुविधाओं (Luxury Amenities) के लिए जाना जाता है। इसका नाम है इंस्टिट्यूट ले रोज़ी (Institut Le Rosey), जो स्विट्जरलैंड में स्थित है। आइए, जानते हैं इस स्कूल की खासियत और इसकी चौंका देने वाली फीस।

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दुनिया का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल
इंस्टिट्यूट ले रोज़ी (Institut Le Rosey) को दुनिया का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल माना जाता है। यहां पढ़ने वाले छात्रों को न सिर्फ उच्चस्तरीय शिक्षा दी जाती है, बल्कि वे एक रॉयल लाइफस्टाइल का भी आनंद लेते हैं। इस स्कूल में 50 से अधिक देशों के छात्र पढ़ाई करते हैं, जिनमें कई अमीर और शाही परिवारों के बच्चे शामिल हैं।
सालाना फीस जानकर दंग रह जाएंगे आप
इस स्कूल की फीस किसी भी बड़े विश्वविद्यालय से कई गुना अधिक है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक छात्र की सालाना फीस लगभग 1.11 करोड़ रुपये (करीब 1,33,000 अमेरिकी डॉलर) है। यह रकम दुनिया के किसी भी सामान्य स्कूल या कॉलेज की तुलना में बेहद ज्यादा है।

‘स्कूल ऑफ किंग्स’- जहां पढ़े हैं राजघरानों के बच्चे
यह स्कूल आम लोगों के लिए नहीं है। यहां स्पेन, बेल्जियम, ईरान, मिस्र और ग्रीस जैसे देशों के राजघरानों के बच्चे पढ़ चुके हैं। इसी वजह से इसे ‘School of Kings’ भी कहा जाता है। कई देशों के राजा, राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यावसायिक परिवारों के उत्तराधिकारी इसी स्कूल से पढ़कर निकले हैं।
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दो शानदार कैंपस और लग्जरी सुविधाएं
इंस्टिट्यूट ले रोज़ी (Institut Le Rosey) के दो कैंपस इसे और भी अनूठा बनाते हैं। पहला कैंपस स्विट्जरलैंड के Rolle शहर में है, जबकि दूसरा सर्दियों में Gstaad के बर्फीले इलाके में खोला जाता है। स्कूल में टेनिस कोर्ट, शूटिंग रेंज, हॉर्स राइडिंग एरिया और करीब 4 अरब रुपये की लागत से बना कॉन्सर्ट हॉल जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं।

हर छात्र पर दिया जाता है व्यक्तिगत ध्यान
इस स्कूल में एक समय में केवल 280 छात्र ही पढ़ते हैं। बता दें कि हर छात्र को व्यक्तिगत ध्यान और प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां के शिक्षक दुनिया के अलग-अलग देशों से चुने जाते हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि छात्रों के व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास करना होता है।
1880 में हुई थी स्थापना
इंस्टिट्यूट ले रोज़ी (Institut Le Rosey) की स्थापना साल 1880 में पॉल कर्नल (Paul Carnal) ने की थी। तब से लेकर आज तक यह स्कूल दुनियाभर के अमीर और शाही परिवारों की पहली पसंद बना हुआ है। यहां शिक्षा को केवल करियर नहीं, बल्कि एक ‘लक्जरी लर्निंग एक्सपीरियंस’ के रूप में देखा जाता है।

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क्यों है यह स्कूल इतना खास?
इस स्कूल की लोकप्रियता केवल इसकी फीस या सुविधाओं के कारण नहीं है, बल्कि इसके शिक्षण ढांचे (Education Structure) की वजह से भी है। यहां छात्रों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और वैश्विक सोच वाला नागरिक बनने की ट्रेनिंग दी जाती है। यही कारण है कि इंस्टिट्यूट ले रोज़ी (Institut Le Rosey) को आज ‘दुनिया का सबसे एलिट स्कूल’ कहा जाता है।
