School Fee: नोएडा से गाजियाबाद..हर जगह पेरेंट्स इन दिनों बेहद परेशान हैं। वजह है बच्चों की स्कूल की फी बढ़ा दी गई है। वो भी करीब 15 फीसदी तक। इसका सीधा असर पेरेंट्स की जेब पर पड़ रहा है। स्कूलों में ही स्टेशनरी बेची जा रही है, जिसे रोकने में जिला प्रशासन, माध्यमिक शिक्षा विभाग नाकाम साबित हो रहा है। गाजियाबाद के सेक्टर 15 स्थित सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में फीस बढ़ोतरी को लेकर पेरेंट्स ने जमकर बवाल काटा।
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आपको बता दें कि गौतमबुद्ध नगर जिले में 500 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं। इन स्कूलों के नर्सरी में एडमिशन की फीस 20 हजार से भी ज्यादा है। कुछ स्कूलों में यह 38 से 40 हजार रुपये तक है। इसी प्रकार 10वीं कक्षा में एडमीशन फीस 20,500 से 65 हजार रुपये तक है। नर्सरी और यूकेजी की एडमिशन फीस 20,200, पहली से पांचवी कक्षा में प्रवेश की फीस 20,300 और छठवीं और आठवीं की फीस 20,400 और नौवीं और दसवीं की प्रवेश फीस 20,550 रुपये है।
संज्ञान में होने के बाद भी एक्शन नहीं
पेरेंट्स एसोसिएशन के मुताबिक फीस मामले को लेकर डीएम ने एक कमिटी बनाई है। यह कमिटी भी एक्शन लेने की जगह सिर्फ कागजों पर ही काम कर रही है। यह कमिटी सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति कर रही है। स्कूलों की मनमानी से जुड़ी शिकायत को सुनने के लिए जिला शुल्क नियामक समिति का गठन हुआ है। इसके लिए डीएम को अध्यक्ष बनाया गया है। पिछले 2-3 सालों में पेरेंट्स के शिकायत करने के बाद भी इस समिति ने कोई एक्शन नहीं लिया। साल 2019 में डीएम रहे बीएन सिंह के समय जिला शुल्क नियामक समिति ने 46 स्कूलों को नोटिस भेजे थे। उस समय सुनवाई करते हुए एक्शन भी हुआ था।

ANSPA बोली स्कूलों की मनमानी पर लगे रोक
ANSPA– ऑल नोएडा पेरेंट्स एसोसिएशन के महासचिव के अरुणाचलम का मानना है कि कोई भी स्कूल 14% फीस एकदम से नहीं बढ़ा सकते। अरुणाचलम के मुताबिक जो नया फी रेगुलेटरी एक्ट आया है उसके हिसाब से स्कूल ज्यादा से ज्यादा 8-10 फीसदी तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। उसके लिए भी उन्हें अप्रैल से 3 महीने पहले फीस बढ़ाने की खबर वेबसाइट पर डालनी जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर DFRC ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। अरुणाचलम ने यूपी की योगी सरकार से फीस बढ़ोतरी पर संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की अपील की है।
स्कूल पर एक्शन क्यों नहीं?
वहीं पेरेंट्स का मानना है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे कोचिंग सेंटरों पर जिला प्रशासन ने शिक्षा विभाग के साथ मिलाकर कार्यवाही की थी। ऐसे में स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आखिर अधिकारी नतमस्तक क्यों हैं? स्कूलों की फीस, स्टेशनरी, ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर ज्यादा फीस लेने की अभिभावक सोशल मीडिया के जरिये लगातार शिकायत कर रहे हैं।
फीस, स्टेशनरी वसूली जा रही है मोटी रकम!
पेरेंट्स का मानना है कि स्कूल में फीस के साथ ही स्टेशनरी के नाम पर मनमानी हो रही है। शिक्षा विभाग स्कूल कैंपस में स्टेशनरी बेचने से मना करता है, लेकिन स्कूलों के वेंडर अंदर ही बैठकर लोगों से पैसे वसूल रहे हैं। एक बार में पूरा सेट देते हैं, जो पेरेंट्स के लिए समस्या का कारण है। बच्चों को पढ़ाना है तो मनमानी झेलनी पड़ेगी।
ट्रांसपोर्ट के नाम पर भी खूब हो रही है मनमानी!
पेरेंट्स के मुताबिक घर से बच्चे के स्कूल की दूरी सिर्फ दो से तीन किमी है। ऐसे में प्रबंधन को ट्रांसपोर्ट के नाम पर किलोमीटर के हिसाब से पैसे लेने चाहिए, लेकिन इसका फिक्स चार्ज 4 हजार रुपये ले रहे हैं। ये चार्ज बाकी चीजों की तरह जेब पर बोझ है।
आपको बता दें कि अप्रैल से स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो गई है। नया सत्र शुरू होते ही प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन फीस के साथ ही दूसरे चीजों के दाम में खूब बढ़ोत्तरी हो गई है।
