सांसद राघव चड्ढा ने संसद में AI क्रांति पर बोले: “चीन के पास DeepSeek है, अमेरिका के पास ChatGPT- भारत कहां खड़ा है?”
राज्यसभा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बोलते हुए सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि भारत को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और वैश्विक नेता बनना होगा
राघव चड्ढा ने सरकार से अपील की कि एआई में निवेश बढ़ाया जाए, युवाओं को स्किल किया जाए और एआई को गवर्नेंस में शामिल किया जाए
उन्होंने चेताया कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो भारत तकनीक के मामले में पूरी तरह से अमेरिका और चीन पर निर्भर हो जाएगा
Panjab News: राज्यसभा में ज़ीरो आवर के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में स्थिति को लेकर चिंता जताई और देश को वैश्विक स्तर पर एआई हब बनाने की अपील की। चड्ढा ने कहा कि यदि भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति बनना है, तो उसे एआई क्रांति का नेतृत्व करना होगा।
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भारत को AI की वैश्विक दौड़ में आगे बढ़ना होगा
राघव चड्ढा ने अपने भाषण में कहा, ‘अमेरिका के पास ChatGPT, Gemini, और Grok जैसे एआई मॉडल हैं, वहीं चीन के पास DeepSeek और Baidu हैं। इन देशों ने 5 साल पहले ही एआई की शुरुआत कर दी थी। अब सवाल यह उठता है कि भारत कहां खड़ा है?’
उन्होंने बताया कि 2010 से 2022 के बीच दुनिया भर में जितने एआई पेटेंट फाइल हुए, उनमें से 60% अमेरिका ने, 20% चीन ने, और सिर्फ 0.5% भारत ने किए।
भारत में टैलेंट तो है, पर निवेश की कमी है
राघव चड्ढा ने यह भी बताया कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा टैलेंट पूल है और दुनिया की 15% एआई वर्कफोर्स भारत से है, लेकिन इसके बावजूद देश की एआई मिशन की वैल्यू केवल 1 बिलियन डॉलर है। जबकि अमेरिका का 500 बिलियन डॉलर और चीन का 137 बिलियन डॉलर है।
राघव चड्ढा ने हाल ही में ChatGPT के संस्थापक के बयान का हवाला देते हुए कहा कि वे भारत के एआई भविष्य को लेकर पूरी तरह निराश हैं। उन्होंने सवाल उठाया, ‘क्या हम उन्हें सही साबित करेंगे या फिर उन्हें गलत साबित करके भारत को एआई की दुनिया में अग्रणी बनाएंगे?’
AI सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सुरक्षा और स्वतंत्रता का मुद्दा है
राघव चड्ढा ने कहा कि एआई अब केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता, और आर्थिक स्वतंत्रता से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए, उन्होंने सरकार से अपील की कि भारत को स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने होंगे, ताकि देश विदेशी तकनीक पर निर्भर न रहे।
राघव चड्ढा ने सरकार को दिए सुझाव
- देश में स्वदेशी एआई चिप्स और सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाए।
- चिप मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन दिया जाए और समर्पित एआई कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित किए जाएं।
- स्वतंत्र एआई मॉडल (Sovereign AI) विकसित किए जाएं, ताकि भारत की डेटा सुरक्षा और रणनीतिक संप्रभुता बनी रहे।
- शोध संस्थानों और स्टार्टअप्स को रिसर्च ग्रांट्स दिए जाएं।
- टैलेंट माइग्रेशन को रोका जाए और देश के टैलेंट को भारत में ही अवसर दिए जाएं।
‘Make AI in India’ को बनाएं राष्ट्रीय आंदोलन
राघव चड्ढा ने इस बात को जोर देकर कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ को सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि अब इसे ‘Make AI in India’ के रूप में विस्तार दिया जाए और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा, ‘140 करोड़ भारतीय पूछ रहे हैं- क्या हम एआई के सिर्फ उपभोक्ता बनेंगे या निर्माता बनकर दुनिया को दिशा दिखाएंगे? यह भारत का एआई मोमेंट है। अब नहीं जागे, तो बहुत देर हो जाएगी।’
राष्ट्रीय AI रणनीति की आवश्यकता
राघव चड्ढा ने सरकार से यह मांग की कि वह तुरंत एक राष्ट्रीय एआई रणनीति तैयार करे, जिसमें स्पष्ट समयसीमा, निवेश योजना और क्रियान्वयन की रूपरेखा हो, ताकि भारत इस वैश्विक दौड़ में पीछे न रह जाए।
