Punjab News: पंजाब में बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ मजबूत अभियान, 1163 बच्चों को मिला नया जीवन

पंजाब
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Punjab News: चंडीगढ़, 9 जून। पंजाब सरकार बाल भिक्षावृत्ति को खत्म करने और बच्चों को सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विजन के तहत सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाया जा रहा “प्रोजेक्ट जीवनज्योत” अब एक सफल मॉडल के रूप में सामने आया है। इसी पहल को आगे बढ़ाने के लिए चंडीगढ़ के एमजीएसआईपीए में “प्रोजेक्ट जीवनज्योत – भीख मांगने वाले बच्चों का बचाव और पुनर्वास” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि बच्चों को शोषण और असुरक्षा से बाहर निकालने वाला एक सामाजिक आंदोलन है।

1163 बच्चों को बचाया, शिक्षा और सुरक्षा से जोड़ा

डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि जुलाई 2024 से अब तक पूरे पंजाब में 2067 विशेष बचाव अभियान चलाए गए हैं। इन अभियानों के दौरान 1163 बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया। बचाए गए बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि 15 मामलों में डीएनए जांच कर बच्चों को उनके परिवारों से दोबारा मिलाया गया। वहीं 409 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया है। 54 बच्चों को प्रायोजन योजनाओं का लाभ मिला है और 15 बच्चों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा गया है।

भिक्षावृत्ति से बच्चों पर पड़ता है गंभीर असर

मंत्री ने कहा कि भीख मांगने वाले बच्चे कई तरह के खतरों का सामना करते हैं। इनमें बाल श्रम, मानव तस्करी, नशे की लत, अपराध और शोषण जैसी समस्याएं शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में लाना और उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी बच्चा जन्म से भिखारी नहीं होता। सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों के कारण बच्चे इस स्थिति में पहुंचते हैं। ऐसे बच्चों को अवसर, सुरक्षा और बेहतर माहौल देना सरकार की प्राथमिकता है।

लाभार्थी बच्चों और परिवारों से किया संवाद

कार्यक्रम के दौरान डॉ. बलजीत कौर ने परियोजना से लाभान्वित बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने उनकी जीवन यात्रा और बदलाव की कहानियां सुनीं। इस अवसर पर मंत्री ने प्रोजेक्ट जीवनज्योत पर आधारित आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की, जिसमें परियोजना की सफलता और प्रभाव को दिखाया गया।

शिक्षा और पुनर्वास पर विशेष जोर

सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. शेना अग्रवाल ने कहा कि प्रोजेक्ट जीवनज्योत का उद्देश्य केवल बच्चों को बचाना नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और विकास के अवसरों से जोड़ना भी है। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों, पुलिस, मीडिया और सामाजिक संगठनों के सहयोग से इस अभियान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव

कार्यशाला में विभिन्न जिलों के अधिकारी, बाल संरक्षण इकाइयों के प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, बाल कल्याण समितियों के सदस्य और कई अन्य हितधारक शामिल हुए। तकनीकी सत्रों में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला की प्रोफेसर दमंजीत संधू ने बच्चों पर भिक्षावृत्ति के मानसिक प्रभाव और काउंसलिंग की आवश्यकता पर चर्चा की। वहीं हरियाणा के पूर्व डीजीपी के.पी. सिंह ने बाल तस्करी और संगठित भिक्षावृत्ति नेटवर्क पर रोक लगाने के उपाय बताए।

पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि बाल भिक्षावृत्ति जैसी समस्या का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए परिवारों, समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चा सड़क पर नहीं, बल्कि स्कूल में दिखाई दे और उसे बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिले।