Punjab haryana water dispute

Punjab News: पंजाब ने दिया हरियाणा की 103% पानी फिर भी विवाद क्यों?

पंजाब राजनीति
Spread the love

Punjab News: पंजाब और हरियाणा के बीच सालों से चले आ रहे जल विवाद (Water Dispute) ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। हरियाणा ने पंजाब से पानी देने को कहा जिसे सीएम भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) ने साफ इंकार कर दिया। सीएम मान (CM Mann) का कहना है कि हमने हरियाणा के हिस्से का 103% पानी पहले ही दे दिया है। अभी भी मानवता के आधार पर हम 4000 क्यूसेक पानी दे रहे हैं। लेकिन अब हमारे पास पानी की एक भी बूंद नहीं है और हम अपने ही पानी का इस्तेमाल अपने लिए कर रहे हैं।

Pic Social Media

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तीनों डैम में पानी पिछले साल की अपेक्षा काफी कम है। भाखड़ा डैम में पिछले साल पानी 1567 फुट था जो इस साल 1555 फुट है। पौंग बांध में पिछले साल पानी 1325 फुट था जो इस साल कम होकर 1293 फुट रह गया और रंजीत सागर डैम में पानी पिछले साल 506 मीटर था जो इस साल 501 मीटर रह गया है, यानी 16 फुट कम।

अतिरिक्त दबाव बना रहा है हरियाणा

सीएम मान (CM Mann) का कहना है कि हरियाणा 8500 क्यूसेक पानी अतिरिक्त तौर पर मांग रहा है और बीबीएमबी के जरिए हम पर दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि बादल सरकार या कैप्टन सरकार के समय पानी का कोई हिसाब नहीं रखा जाता था लेकिन हम एक एक बूंद का हिसाब रखते हैं। हमने अपना नहरी सिस्टम ठीक करके अंतिम छोर तक पानी पहुंचाया है। हर रोज नई जमींदोज पाइपें पड़ रही हैं ताकि कोई खेत पानी के बिना न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने अपने हिस्से का पानी उपयोग करने में कोई संयम नहीं बरता। अब हमसे अतिरिक्त पानी की उम्मीद कर रहे हैं जबकि अगले महीने हमें धान की फसल लगाने के लिए अतिरिक्त पानी की आवश्यकता है। इसके बावजूद हम 4000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी पीने के लिए दे रहे हैं।

Pic Social Media

केंद्र पर सीएम मान का तंज

मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा कहती है कि उन्होंने इंडस जल समझौता रद्द करके पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोक दिया है, यह पानी हमें दे दीजिए। हमारे बांध भर दीजिए और हम इसे हरियाणा को दे देंगे। चिनाब, झेलम का पानी तो पंजाब से गुजरकर भेजना होगा। हमारे ऊपर से तो कोई रास्ता नहीं है।

सीएम सैनी पर सीएम मान का हमला?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) का आरोप है कि हरियाणा के सीएम सैनी, पानी पर पंजाब के लोगों के साथ दोहरी राजनीति कर रहे हैं। एक तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दावा करते हैं कि पंजाब में अगली सरकार भाजपा की ही बनाएंगे, वहीं दूसरी तरफ पंजाब का पानी लूटने और दिनदहाड़े लूटने की नीति पर चलते हुए सतलुज-यमुना लिंक नहर के पुनर्निर्माण पर अड़े हुए हैं और पंजाब के मुख्यमंत्री को पंजाब से पीने के पानी के लिए पत्र भी लिख रहे हैं। इससे भाजपा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा पंजाब के प्रति खेली जा रही दोहरी राजनीति का खेल साफ नजर आ रहा है।

पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के टकराव को लेकर केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की अचानक बुलाई गई बैठक में हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि यह बैठक बीबीएमबी द्वारा बांधों की सुरक्षा को लेकर बुलाई गई थी, लेकिन बैठक का मुख्य मुद्दा हरियाणा को 8500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराना था।

पानी के बारे में बातचीत कहां से शुरू हुई?

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) को पत्र लिखकर हरियाणा के कई हिस्सों में पेयजल की कमी का हवाला देते हुए 8500 क्यूसेक पानी की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में हरियाणा को मई व जून माह में 9500 क्यूसेक तक पानी मिलता रहा है। उन्होंने 23 अप्रैल को आयोजित बीबीएमबी बैठक का भी उल्लेख किया।

सूत्रों के अनुसार पंजाब जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव कृष्ण कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि बांधों में पानी का स्तर कम है और मरम्मत कार्य के चलते पौंग बांध 45 दिनों के लिए बंद है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पिछले दो वर्षों से हरियाणा को लिख रही है कि भविष्य में मानवीय आधार पर भी पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा, क्योंकि पंजाब ने अपने राज्य में पुरानी नहरों व ड्रेनों को पुनर्जीवित कर दिया है, जिसके कारण पंजाब में पानी की मांग बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार माहौल में तनाव को देखते हुए बीबीएमबी चेयरमैन ने कहा कि दोनों राज्यों को आपसी सहमति से इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए। राजस्थान से जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान जारी कर कहा है कि भाजपा की केंद्र सरकार पंजाब के पानी को लेकर एक और गंदी चाल चल रही है, हम इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे। भगवंत मान ने कहा कि केंद्र सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के माध्यम से हरियाणा पर अधिक पानी उपलब्ध कराने का दबाव बना रही है, जबकि हरियाणा पहले ही अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है।

पानी छोड़ने के संबंध में हरियाणा में क्या स्थिति है?

1. बीबीएमबी ने इस वित्तीय वर्ष के लिए हरियाणा को 2.987 एमएएफ पानी आवंटित किया है, जिसका उपयोग 21.05.2025 तक किया जाना है। यह बांध में पानी की उपलब्धता के अनुसार देय था।

2. हरियाणा राज्य ने अपना आवंटित हिस्सा पहले ही समाप्त कर लिया है तथा 25.04.2025 तक अपने हिस्से (अपने हिस्से का कुल 103%) से लगभग 0.104 एमएएफ अधिक पानी का उपयोग कर लिया है।

3. हरियाणा राज्य ने पंजाब राज्य से अप्रैल, 2025 के आरम्भ तक हरियाणा समरक प्वाइंट पर पीने/घरेलू/थर्मल और पशुधन के लिए 4000 क्यूसेक पानी छोड़ने की अपील की है।

4. यद्यपि हरियाणा राज्य ने अपने हिस्से का पानी समाप्त कर लिया है, फिर भी पंजाब राज्य ने हरियाणा राज्य के अनुरोध के अनुसार मानवीय आधार पर पेयजल आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रतिदिन 4000 क्यूसेक पानी छोड़ने पर तुरंत सहमति व्यक्त की है तथा 6 अप्रैल से आज तक यह पानी की मात्रा जारी कर रहा है।

5. अब हरियाणा राज्य ने 8500 क्यूसेक की दैनिक मांग रखी है जो उचित नहीं है क्योंकि वे पहले ही अपना हिस्सा समाप्त कर चुके हैं और केवल 4000 क्यूसेक पेयजल की आवश्यकता प्रदान की जा सकती है।

 पंजाब और हरियाणा के बीच करीब 57 साल पुराना सतलुज यमुना लिंक (SYL) विवाद समय के साथ-साथ गहराता ही जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी समय-समय पर नहर से जुड़े मुद्दे को सौहार्द्रपूर्ण ढंग से हल करने की बात कही है।

SYL नहर विवाद क्या है?

पंजाब से हरियाणा के गठन से कुल 10 साल पहले 1955 में रावी और ब्यास के पानी का आकलन 15.85 मिलियन एकड़ फीट (MAF) किया गया गया। फिर सरकार ने इसी साल राजस्थान, पंजाब और जम्मू कश्मीर के बीच एक मीटिंग बुलाई थी। इस बैठक में राजस्थान को आठ, पंजाब को 7.20 व जम्मू कश्मीर को 0.65 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किया गया था।

पंजाब पुनर्गठन एक्ट

साल 1966 में पंजाब पुनर्गठन एक्ट के बाद से पंजाब और हरियाणा दो अलग-अलग राज्य बनाए गए। हरियाणा के गठन के बाद पंजाब के हिस्से में जो 7.2 MAF पानी था। अब इसे हरियाणा के साथ बांटा गया और 3.5 MAF का हिस्सा दिया गया। वहीं, पंजाब ने राइपेरियन सिद्धांतों (Riparian Water Rights) का हवाला देते हुए दोनों नदियों का पानी हरियाणा को देने से इनकार कर दिया।

दरअसल, राइपेरियन जल अधिकारियों के मुताबिक, जल निकाय से सटे भूमि के मालिक को पानी का उपयोग करने का अधिकार है। पंजाब की तरफ से समय-समय पर यह भी बात सामने आई है कि राज्य के पास अतिरिक्त पानी न होने के कारण किसी और राज्य से इसे साझा नहीं किया जा सकता।

ये भी पढ़ेंः Punjab News: जमीनी स्तर पर होगा नशों का खात्मा

सतलुज-यमुना लिंक नहर (SYL) क्या है?

10 सालों से चल रहे विरोध के बाद केंद्र सरकार ने साल 1976 में पानी के बंटवारे पर एक अधिसूचना जारी की, लेकिन दोनों राज्यों में विवाद इतना ज्यादा था कि इसे लागू करना मुश्किल हो गया। हालांकि, हरियाणा ने 1980 तक अपने क्षेत्र में नहर को लेकर परियोजना पूरी कर ली थी। दोनों राज्यों में लगातार टकराव जारी था। बातचीत से भी कोई हल न निकलने के बाद साल 1981 में ‘सतलुज-यमुना लिंक नहर’ पर समझौता किया गया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी आधारशिला

आठ अप्रैल, 1982 को   पंजाब के पटियाला के एक गांव कपूरई में सतलुज-यमुना लिंक नहर (SYL) की आधारशिला रखी थी। एसवाईएल नहर की कुल लंबाई 214 किलोमीटर है। इसमें से पंजाब में 122 किमी हिस्सा है, जबकि हरियाणा के पास 92 किलोमीटर हिस्सा है। पंजाब ने भी 1982 में इसे लेकर काम तो शुरू किया लेकिन विपक्ष की पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने इसका विरोध किया और इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया।

1985 में राजीव-लोंगोवाल समझौता

अब जब पंजाब में इसका विरोध बढ़ गया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अकाली दल के प्रमुख हरचंद सिंह लोंगोवाल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के बाद फिर नहर का कार्य शुरू किया गया लेकिन कुछ उग्रवादियों ने कई इंजीनियरों को और मजदूरों की हत्या कर दी और एक बार फिर परियोजना ठप्प हो गई। इसके बाद से फिर कभी इसे लेकर कार्य शुरू ही नहीं हो पाया।

ये भी पढ़ेंः Punjab: अब नहीं लगेगा जाम दिसंबर 2025 तक दो नए पुलों से अमृतसर-तरनतारन के बीच आवाजाही होगी आसान

पंजाब विधानसभा में 2004 वर्ष में पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स अधिनियम पारित किया जाता है। इस अधिनियम के तहत जल-साझाकरण के सभी समझौतों को खत्म कर दिया जाता है। तब से लेकर अब तक SYL का निर्माण अधर में लटक कर रह गया है। इसके बाद भी दोनों राज्यों के बीच टकराव बरकरार है।