Punjab News: आबकारी नीति मामले में अदालत द्वारा अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामलों को निरस्त करने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने इस फैसले को संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन की जीत बताया है।
23 आरोपियों के खिलाफ मामला समाप्त
स्पीकर संधवां ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के खिलाफ मामला खत्म होना इस बात का प्रमाण है कि आरोप अदालत में साबित नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच में आरोप टिक नहीं पाए।
सत्य की जीत हुई: संधवां
कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि लोकतंत्र में अंततः सत्य की जीत होती है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल केवल बरी ही नहीं हुए, बल्कि सच साबित होकर सामने आए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना ठोस सबूत के किसी निर्वाचित मुख्यमंत्री का नाम लेना सही नहीं है। अदालत का फैसला जवाबदेही और कानून के पालन की अहमियत को दर्शाता है।
बदले की राजनीति का आरोप
स्पीकर संधवां ने कहा कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था। लेकिन अदालत के निर्णय ने यह साफ कर दिया कि कानून और संविधान सबसे ऊपर हैं।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल एक ईमानदार और दूरदर्शी नेता हैं, जो जनता के हित में काम करते रहे हैं।
लोकतंत्र में न्याय सबसे अहम
संधवां ने अपने बयान में कहा कि जब न्याय की जीत होती है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। यह फैसला देश में संवैधानिक व्यवस्था और कानून के शासन को मजबूत करने वाला है।
कुल मिलाकर, इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी और नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
