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Punjab News: विवादित वीडियो पर श्री अकाल तख्त के सामने पेश हुए थे भगवंत मान, अब सामने आई पूरी बातचीत

पंजाब
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Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और एक विवादित वीडियो को लेकर चल रहे मामले में नया मोड़ आ गया है। श्री अकाल तख्त साहिब ने जनवरी 2026 में हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए पक्ष का वीडियो और विवरण सार्वजनिक किया है। इस मामले में मुख्यमंत्री ने वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया था और इसकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की थी।

मान बोले- AI के दौर में नकली वीडियो बनाना आसान

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किसी का भी फर्जी वीडियो तैयार किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित वीडियो भी नकली है और उनके खिलाफ पहले भी इस तरह की सामग्री प्रसारित की जा चुकी है।

जत्थेदार ने उठाए सवाल

श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मुख्यमंत्री से पूछा कि वीडियो की सच्चाई सामने लाने के लिए किन सरकारी फोरेंसिक लैब्स में जांच कराई जा सकती है। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के लिए सहमति जताई और कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार पूरा सहयोग करेगी।

गुरुओं की मर्यादा से जुड़ा मामला

जत्थेदार ने कहा कि यह मामला गुरुओं की मर्यादा और सम्मान से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि वीडियो फर्जी निकला तो किसी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, लेकिन यदि वीडियो असली हुआ तो सच्चाई भी सामने आनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जताई जांच के लिए सहमति

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि फोरेंसिक जांच जत्थेदार की निगरानी में और उनकी पसंद की किसी भी लैब में कराई जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार वीडियो बिना जांच के भी फर्जी नजर आता है।

कोर्ट के आदेश का भी हुआ जिक्र

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एक अदालत ने वीडियो को फर्जी माना है। इस पर जत्थेदार ने कहा कि उन्होंने संबंधित अदालत के आदेश का अध्ययन किया है और उसमें कहीं भी वीडियो की फोरेंसिक जांच का निर्देश नहीं दिया गया है।

अकाल तख्त ने बनाई स्वतंत्र जांच की योजना

श्री अकाल तख्त ने निर्णय लिया कि वीडियो की जांच दो स्वतंत्र फोरेंसिक लैब्स से कराई जाएगी। साथ ही पंजाब सरकार से भी दो सरकारी लैब्स के नाम देने को कहा गया ताकि अलग-अलग स्तर पर जांच हो सके।

जगमन समरा का भी आया नाम

मुख्यमंत्री ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह वीडियो साझा करने वाले जगमन समरा पहले भी उनके खिलाफ इस तरह की सामग्री प्रसारित कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे वीडियो की जांच की आवश्यकता क्यों है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यदि श्री अकाल तख्त चाहे तो सरकार जांच में पूरा सहयोग करेगी।

फोरेंसिक जांच को लेकर नया दावा

श्री अकाल तख्त की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि बाद में कराई गई फोरेंसिक जांच में वीडियो को वास्तविक पाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद सरकार की ओर से दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के नाम उपलब्ध नहीं कराए गए।

मामला क्यों बना चर्चा का विषय?

यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक मर्यादा, राजनीतिक जवाबदेही और आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में फोरेंसिक जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।