स्वामी वैराग्यनंद गिरी जी महाराज ने महामंडलेश्वर ज्योतिमर्यानंद के खिलाफ खोला मोर्चा
Noida News: महामंडलेश्वर योगपुरुष परमानंद गिरि महाराज के भतीजे एवं महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंद पर बड़ा आरोप लगा है। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यनंद जी महाराज का आरोप है कि आश्रम की संपत्ति हड़पने के लिए के लिए ज्योतिर्मयानंद तमाम तरह के हथकंडे अपना रहे हैं जो कि साधु-संतों के लिए चिंता का विषय है।

स्वामी वैराग्यनंद के मुताबिक उज्जैन स्थित चार धाम मंदिर पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद जी महाराज मालवा प्रांत के एक वैभवशाली संत हैं। महाराज जी ने आदिवासी क्षेत्र में ना सिर्फ सनातन धर्म का प्रचार किया बल्कि उसके गौरव को भी बढ़ाया। स्वामी स्वरूपानंद जी ने चार धाम जैसे मंदिर की स्थापना डाल करके विश्व में इसकी ख्याति और ज्यादा गौरवान्वित किया। महाकाल और हरसिद्धि के बाद चार धाम मंदिर की ख्याति शांति स्वरूपानंद जी की योग्यता से और ज्ञान की बुनियाद से डाली गई जो देश-विदेश में ध्वजा लहरा रही है। ऐसे में स्वामी वैराग्यनंद गिरी जी महाराज ने स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज को गद्दी सौंपने की अपील की है।

स्वामी वैराग्यनंद महाराज का आरोप है कि दूसरी तरफ योग्य पुरुष स्वामी परमानंद जी के भतीजे ज्योतिर्मयानंद समस्त आश्रम के व्यवस्थापकों की संपत्ति हड़पने के लिए कुकृत करके महापुरुषों को बदनाम करने की साजिश कर रहा है, ज्योतिर्मयानंद का बचपन से रिकॉर्ड खराब हो रहा है और जिस अखंड आश्रम की बात की रही है वे अखंडानंद जी के कृपापात्र शिष्य महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज स्वयं ही अखंड आश्रम के व्यवस्थापक नहीं है इनकी आईडी में इनके पिताजी का नाम कालीचरण का नाम लिखा है। महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यनंद जी महाराज ने बताया संतों की परंपरा संत ही संभाल सकते हैं ना कि कोई गैर। ऐसे में मानसिक संतुलन शांति स्वरूपानंद जी का नहीं इस वक्त मानसिक संतुलन योग पुरुष स्वामी परमानंद जी का बिगड चुका है।

अत: मैं स्वामी वैराग्यनंद सरकार से निवेदन हूं प्रार्थना करता हूं कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करने की अपील करता हूं। आश्रमों की संपत्ति हड़पने के लिए जो गंदा खेल चल रहा है उसे दुनिया के सामने आना ही चाहिए। क्योंकि संत देश के वो नायाब हीरे हैं जिन्होंने सनातन के लिए अपना सबकुछ त्याग दिया।
इसलिए मैं देश के प्रधानमंत्री मोदी जी और मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से निवेदन हूं कि चार धाम मंदिर के व्यवस्थापक शांति स्वरूपानंद जी को यह पूरी व्यवस्था दिलवाई जाए क्योंकि जिन्होंने जन्म-जन्मांतर से मेहनत करके चार धाम मंदिर को बनाया। स्वरूपानंद जी को स्थाई रूप से उनका पद प्रतिष्ठा की गरिमा रखते हुए अजीवन जो व्यवस्था थी वह शांति स्वरूपानंद जी के आद्यपद्य में दी जाए। इसके साथ ही मैं समस्त संतों और सनातनियों से अपील करता हूं कि ज्योतिर्मयानंद जी की गुरु पूर्णिमा में चार धाम मंदिर में इनकी एंट्री नहीं होने देंगे समस्त अखाड़े इनका विरोध करेंगे।
जय हिंद, जय भारत, जय गौ माता।
