Noida: Instructions to close all schools in Delhi-NCR due to increasing pollution

Noida: बढ़ते प्रदूषण की वजह से दिल्ली-NCR के सारे स्कूल बंद करने के निर्देश

गाज़ियाबाद ग्रेटर नोएडा- वेस्ट दिल्ली NCR नोएडा
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Noida: दिल्ली- NCR में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। कहीं कहीं तो AQI 500 के ऊपर जा चुका है। हालात इस कदर बदत्तर हो चुके हैं कि सांस लेना तक दूभर हो गया है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. एनसीआर में पांचवी क्लास तक स्कूल बंद रखने के आदेश दिये गये हैं. वहीं कक्षा 6 से 9 और 11 की क्लासें भी हाइब्रिड मोड मोड में चलाने का आदेश दिया गया है. क्योंकि 10वीं और 12वीं क्लासों के लिए कोई निर्देश नहीं आया है इसलिए 10वीं, 12वीं बोर्ड की क्लासें पहले की तरह ही चलती रहेंगी. 

इसके अलावा अगर किसी स्कूल में कक्षा 6 से लेकर 9वीं क्लास तक बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं तो परीक्षाएं जारी रहेंगी. 

बड़ों के मुकाबले छोटे बच्चों में ज़्यादा जा रहा है प्रदूषण
डॉक्टरों के मुताबिक प्रदूषण का असर हर आयु वर्ग पर पड़ता है, लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर होता है. खासकर पांच साल से कम उम्र वाले बच्चे हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं. इसका कारण यह है कि छोटे बच्चे बड़ों की तुलना में तेज और अधिक सांस लेते हैं. यदि 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे किसी प्रदूषित वातावरण में सांस लेते हैं, तो उनके वजन की तुलना में उनके शरीर में प्रदूषण की मात्रा अधिक प्रवेश करती है. इसकी वजह से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. यही कारण है कि डॉक्टर ऐसे छोटे बच्चों को प्रदूषण से बचाने की विशेष सलाह देते हैं.

नोएडा-गाजियाबाद के प्रमुख इलाकों का AQI
गाजियाबाद का औसत:  AQI-500
इंदिरापुरम : AQI-683
वसुंधरा:    AQI- 546
नोएडा सेक्टर 63 : AQI- 331
नोएडा सेक्टर 125 : AQI-999

वायु प्रदूषण का बच्चों-बुजुर्गों पर असर ज्यादा

प्रदूषण बच्चों और बुजुर्गों पर ज़्यादा क्यों असर करता है। यह मान लेना गलत है कि प्रदूषण सबको बराबर नुकसान पहुँचाता है।। बच्चों के फेफड़े और इम्यून सिस्टम अभी विकसित हो रहे होते हैं, और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता उम्र के साथ कमजोर हो जाती है।
 

वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियाँ

बच्चों में

  • बार-बार सर्दी-जुकाम और ब्रोंकाइटिस
  • फेफड़ों का विकास रुकना – यह नुकसान कई बार स्थायी होता है
  • एलर्जी, आँखों में जलन, सिरदर्द
  • एकाग्रता और याददाश्त पर असर (हालिया रिसर्च यही कहती है)

बुजुर्गों में

  • COPD (क्रॉनिक सांस की बीमारी)
  • दमा (Asthma) – लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न
  • हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ना
  • ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल होना
  • फेफड़ों के संक्रमण, निमोनिया
  • पहले से मौजूद बीमारियाँ और बिगड़ जाती हैं

मुख्य कारण
PM2.5, PM10, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, धुआँ


वायु प्रदूषण से बचाव

  • AQI खराब हो तो सुबह-शाम बाहर निकलना कम करें
  • बच्चों और बुजुर्गों को N95 मास्क पहनाएँ
  • घर में गीला पोछा, झाड़ू कम
  • हो सके तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल
  • खिड़कियाँ भीड़-भाड़ वाले समय बंद रखें