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Noida Authority: नोएडा अथॉरिटी के नए CEO से मिलिए, CM योगी से क्या है कनेक्शन

दिल्ली NCR
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Noida Authority: उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण में बड़ा बदलाव करते हुए आईएएस कृष्णा करुणेश को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। यह फैसला हाल ही में हुए इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले के बाद लिया गया है। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे, जिसके चलते सरकार को सख्त कदम उठाना पड़ा।

इंजीनियर की मौत से मचा था हड़कंप

नोएडा के सेक्टर-150 में एक खुले और असुरक्षित गड्ढे में गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। मौके पर सुरक्षा के उचित इंतजाम नहीं थे और समय पर मदद भी नहीं पहुंच पाई। इस हादसे के बाद लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला और नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही पर सवाल खड़े हुए।

Noida Authority: कौन हैं नए CEO कृष्णा करुणेश

कृष्णा करुणेश 2011 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वे नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने अलग-अलग जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं और सख्त फैसले लेने वाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं।

पुराने CEO को क्यों हटाया गया

इंजीनियर की मौत के बाद प्रशासन पर जनता और विपक्ष का दबाव बढ़ गया था। सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक सामने आई, जिसके चलते सरकार ने पुराने CEO को हटाकर नए नेतृत्व की जिम्मेदारी कृष्णा करुणेश को सौंपी, ताकि व्यवस्था में सुधार किया जा सके।

SIT जांच और सरकार का रुख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT (विशेष जांच टीम) का गठन किया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि लापरवाही किस स्तर पर हुई — बिल्डर की, प्राधिकरण की या किसी अधिकारी की। सरकार ने साफ कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

हादसे के बाद किए गए सुधार

घटना के बाद प्रशासन ने खतरनाक जगहों पर संकेत बोर्ड लगाने, सड़क पर सुरक्षा मार्किंग करने और रोशनी की व्यवस्था जैसे कदम उठाए हैं। इसका मकसद भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकना है। नोएडा में हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गया। नए CEO की नियुक्ति से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि जन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। अब लोगों को उम्मीद है कि नए नेतृत्व में नोएडा की व्यवस्था बेहतर होगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।