देश के प्रमुख न्यूज़ चैनलों में शामिल NDTV एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी को लेकर सुर्खियों में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अडानी समूह के स्वामित्व वाले इस चैनल में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नोटिस भेजे गए हैं। यह नोटिस रिपोर्टर, एंकर, कैमरामैन, हिंदी और अंग्रेज़ी डेस्क के कर्मचारी, टीम हेड और पीसीआर से जुड़े लोगों को भेजे जाने की बात सामने आ रही है।
पत्रकारों को क्यों भेजे गए नोटिस

न्यूज़ लॉन्ड्री में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एनडीटीवी के एचआर विभाग की ओर से संबंधित कर्मचारियों को ई-मेल भेजे गए हैं। इन ई-मेल में कहा गया है कि कर्मचारी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे टीम के कामकाज पर असर पड़ रहा है। ई-मेल में कर्मचारियों को इसे चेतावनी मानते हुए तुरंत अपने टीम लीडर और विभाग प्रमुख से बात करने के निर्देश दिए गए हैं।
परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) क्या है
जिन कर्मचारियों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें कंपनी की आधिकारिक भाषा में परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) में रखा गया है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपने प्रदर्शन में सुधार के लिए एक तय समयसीमा दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह समय 5 से 10 मार्च के बीच का बताया जा रहा है। यदि इस अवधि में प्रदर्शन में सुधार नहीं होता, तो नौकरी पर आगे निर्णय लिया जा सकता है।
कर्मचारियों की चिंता क्यों बढ़ी
एनडीटीवी के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने बताया कि संस्थान में पीआईपी को अक्सर छंटनी से पहले का कदम माना जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल अप्रैल में भी अप्रेज़ल से पहले करीब 100 कर्मचारियों को पीआईपी में डाला गया था, जिनमें से कई को बाद में नौकरी से निकाल दिया गया था। इसी वजह से इस बार भी कर्मचारियों में असुरक्षा और चिंता का माहौल बना हुआ है।
अडानी समूह के बाद हुए बड़े बदलाव
दिसंबर 2022 में अडानी समूह द्वारा प्रणय रॉय और राधिका रॉय से हिस्सेदारी खरीदने के बाद से एनडीटीवी में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। चैनल के ढांचे, टीम और कार्यशैली में लगातार परिवर्तन किए गए। अप्रैल 2025 में भी कर्मचारियों की छंटनी हुई थी। उस समय कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि पुराने एनडीटीवी से जुड़े लोगों को ज्यादा निशाना बनाया गया।
मीडिया इंडस्ट्री के लिए क्या संकेत
एनडीटीवी में हो रही यह प्रक्रिया केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की मीडिया इंडस्ट्री में बदलते दौर को भी दिखाती है। लागत कम करना, प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन और कॉर्पोरेट मॉडल का बढ़ता असर अब न्यूज़रूम तक साफ दिखाई देने लगा है। इससे पत्रकारों की नौकरी की स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सच्चाई की पुष्टि अभी बाकी
यह खबर सूत्रों और न्यूज़ लॉन्ड्री में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है। एनडीटीवी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इस जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
