MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के संभावित असर को देखते हुए राज्य में ईंधन और खाद्य आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर सरकार ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने की तैयारी की है, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत या राज्य की आपूर्ति व्यवस्था पर पड़े, तो उससे निपटने के लिए पहले से तैयारी की जा सके।
पेट्रोल-डीजल और गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। साथ ही LPG और CNG की सप्लाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।
इसी कारण मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य में उपलब्ध ईंधन भंडार का आकलन करने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत रखने के निर्देश दिए हैं।
खाद्य सुरक्षा और जरूरी वस्तुओं की भी समीक्षा
समीक्षा बैठक में सिर्फ ईंधन ही नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राज्य में अनाज और जरूरी खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
इसके लिए खाद्य आपूर्ति, परिवहन और अन्य संबंधित विभागों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
खाड़ी देशों में फंसे लोगों की मदद पर भी चर्चा
बैठक में उन लोगों की सहायता के उपायों पर भी चर्चा होगी जो पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वहां फंस सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार पहले ही नई दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित कर चुकी है, ताकि खाड़ी देशों में रहने वाले प्रदेश के लोगों को मदद मिल सके।
इस कंट्रोल रूम के माध्यम से राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर भारत सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर सहायता प्रदान करेगी।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर पड़ सकता है। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार ने संभावित स्थिति को देखते हुए पहले से तैयारी शुरू कर दी है। ईंधन भंडार, खाद्य सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखकर सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहती है।
