MP News: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने घोषणा की है कि राज्य सरकार अब उन बेघर और जमीन-हीन परिवारों को जो आवासीय ज़मीन प्रदान की जा चुकी है, उनके रजिस्ट्री (पंजीकरण) खर्च को खुद वहन करेगी। यह घोषणा उन्होंने ग्वालियर में आयोजित किसानों के कार्यक्रम के दौरान की, जहाँ उन्होंने विकास योजनाओं और किसानों के लिए लिए गए सरकार के कदमों पर भी प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय Chief Minister Land Rights Lease Scheme के तहत लिया गया है, जिससे अब परित्यक्त या गरीब परिवारों को मिली ज़मीन पर रजिस्ट्री शुल्क उन्हें खुद न देना पड़े और यह सरकारी बजट से कवर होगा।
बेघर परिवारों को दी जमीन मिलने की पृष्ठभूमि
राज्य सरकार ने 2025 में मध्यप्रदेश अर्बन एरियाज़ लैंडलेस पर्सन्स (लीज़ राइट्स) एक्ट, 1984 में संशोधन किया था ताकि बेघर परिवारों को आवासीय ज़मीन दी जा सके। इस योजना के तहत ज़मीन आवंटन के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण भी किया गया ताकि पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें लाभ मिल सके।
सरकार ने तय किया कि जिन पात्र लोगों को ज़मीन आवंटित की गई है, उनके लिए स्थायी (permanent) और अस्थायी (temporary) दोनों प्रकार की लीज़ आधारित ज़मीन के दस्तावेज़ जारी किए जाएंगे। अब इन ज़मीनों की रजिस्ट्री का खर्च भी सरकार उठाएगी, जिससे परिवारों को राहत मिलेगी और सरकारी जमीन का पक्का अधिकार मिल जाएगा।
रजिस्ट्री से जुड़ी व्यवस्थाएँ और लाभ
मध्यप्रदेश की शहरी स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया गया है कि जहां स्थायी लीज़ आधारित ज़मीन दी गई है, वहाँ सड़क, पेयजल, सीवरेज और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहले प्राथमिकता पर दी जाएँ। इसका उद्देश्य यह है कि जिन परिवारों को पक्के आवास की जमीन मिली है, वे वहाँ सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रह सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति फर्जी जानकारी के माध्यम से इस योजना का लाभ लेने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसे लोगों को योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
किसानों और गरीब वर्ग के समर्थन में बजट नीति
सीएम यादव ने बजट सत्र में पहले ही सरकार द्वारा किसान कल्याण और कमजोर वर्गों के लिए बड़ा प्रावधान रखने की बात कही थी, जिसमें राजनीति ने कहा कि यह पहली बार है कि किसानों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है और इसी बजट में गरीबों के लिए भी राहत योजनाएँ प्रस्तावित हैं।
उनके अनुसार, कृषि, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के साथ ही भूमि अधिकार योजनाओं में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है और यह कदम इसी का हिस्सा है।
पात्रता और प्रक्रिया
इस योजना के लिए पात्रता तय करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2020 रखी गई थी। ज़मीन आवंटन का कार्यक्रम जनवरी से फरवरी 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें योग्य लाभार्थियों को ज़मीन लीज़ के दस्तावेज़ दिए गए। अब रजिस्ट्री के खर्च को सरकार वहन करेगी।
इस निर्णय से उन परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा जिनके पास ना तो पक्की ज़मीन थी और ना ही रजिस्ट्री कराने के पैसे – अब उनके लिए ज़मीन स्वामित्व पूरा ढंग से सुनिश्चित होगा।
अगर आप चाहें, मैं इस योजना के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया के चरण या पात्रता मानदंडों पर विस्तृत जानकारी भी तैयार कर सकता हूँ।
