Layoff: फ्रांस की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी की योजना बनाई है।
Layoff: फ्रांस की मशहूर ऑटोमोबाइल कंपनी (Automobile Company) ने दुनियाभर में अपने कर्मचारियों (Employees) की संख्या में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी करीब 3 हजार कर्मचारियों की छंटनी की योजना बना रही है। इस फैसले से कंपनी के विभिन्न देशों में स्थित कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। पढ़िए पूरी खबर…

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ग्लोबल टेंशन और बढ़ती चुनौतियां बनीं वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांस की दिग्गज ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी रेनॉल्ट (Renault) ने अपने कर्मचारियों की संख्या घटाने का निर्णय लिया है। यह बड़ी छंटनी दुनियाभर में कंपनी से जुड़े 3 हजार से अधिक कर्मचारियों को प्रभावित कर सकती है। कंपनी का उद्देश्य लागत घटाना और बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करना बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस छंटनी से जुड़ा अंतिम फैसला वर्ष 2025 के अंत तक लिया जा सकता है।
‘ARROW’ नाम से तैयार हुआ छंटनी प्लान
रेनॉल्ट (Renault) ने अपने इस छंटनी अभियान को ‘ARROW प्लान’ नाम दिया है। इस योजना के तहत मुख्य रूप से सहायक विभागों में नौकरियों में कटौती की जाएगी। इनमें एचआर (HR), फाइनेंस और मार्केटिंग विभाग प्रमुख हैं। अनुमान है कि इन विभागों में लगभग 15 प्रतिशत कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होंगी।
वैश्विक दबाव में लिया गया निर्णय
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी दुनिया में ऑटोमोबाइल सेक्टर इन दिनों कड़ी प्रतिस्पर्धा और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। रेनॉल्ट को यूरोपीय ऑटो कंपनियों के साथ-साथ चीन के इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं से भी कड़ी टक्कर मिल रही है। इससे यूरोप में कंपनी की बिक्री में गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि यूरोप ही रेनॉल्ट का मुख्य बाजार (70 प्रतिशत बिक्री) रहा है। लेकिन कंपनी ने साफ किया है कि इस छंटनी योजना में अमेरिकी टैरिफ का कोई प्रभाव नहीं है, क्योंकि रेनॉल्ट ने तीन दशक पहले अमेरिकी बाजार से अपना कारोबार समेट लिया था।
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मुनाफे में गिरावट से बढ़ा दबाव
रेनॉल्ट (Renault) की वित्तीय स्थिति भी इस निर्णय की बड़ी वजह मानी जा रही है। कंपनी को इस साल की पहली छमाही में 11.2 अरब यूरो का नुकसान हुआ है, जिसमें इसकी पार्टनर कंपनी निसान से जुड़े 9.3 अरब यूरो शामिल हैं। कंपनी की नेट इनकम घटकर केवल 461 मिलियन यूरो रह गई है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में एक तिहाई से भी कम है।
