Jharkhand News: झारखंड में मुख्यमंत्री Hemant Soren के नए आधिकारिक आवास को लेकर राजनीति तेज हो गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 67 करोड़ रुपये बताई जा रही है, लेकिन विपक्ष का दावा है कि कुल खर्च 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
क्या है पूरा मामला
सरकार ने रांची में मुख्यमंत्री के लिए एक नए आवास के निर्माण का टेंडर जारी किया है। यह टेंडर 67 करोड़ रुपये के आसपास का है और इसे 18 महीने में पूरा करने की योजना है।
हालांकि, इसमें केवल निर्माण लागत शामिल है। अंदरूनी सजावट, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं को जोड़ने के बाद कुल खर्च काफी बढ़ सकता है।
विपक्ष के आरोप
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस परियोजना को “शीश महल” बताते हुए कड़ा विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि यह जनता के पैसों का गलत इस्तेमाल है।
BJP नेताओं का आरोप है कि जब राज्य में गरीबों के लिए योजनाएं पूरी तरह लागू नहीं हो पा रही हैं, तब इतने महंगे आवास पर खर्च करना गलत प्राथमिकता दिखाता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतिम लागत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है, जो इसे और विवादास्पद बनाता है।
सरकार और कांग्रेस का जवाब
वहीं, कांग्रेस और सरकार के सहयोगी दलों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह कोई निजी विलासिता नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा जरूरतों से जुड़ा मामला है।
सरकार का तर्क है कि मुख्यमंत्री के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित आवास जरूरी होता है, ताकि शासन बेहतर तरीके से चल सके।
क्यों बढ़ा विवाद
यह मुद्दा इसलिए बड़ा बन गया है क्योंकि एक तरफ राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और अन्य समस्याएं हैं, वहीं दूसरी ओर इतने बड़े खर्च वाली परियोजना सामने आई है।
विपक्ष इसे जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बता रहा है, जबकि सरकार इसे जरूरी प्रशासनिक निवेश मान रही है।
आगे क्या होगा
अब यह देखना अहम होगा कि यह परियोजना आगे बढ़ती है या विरोध के कारण इसमें बदलाव होता है। फिलहाल, यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में बड़ा विवाद बन चुका है और आने वाले समय में और गरमा सकता है।
