Jharkhand News: रांची, 25 जून: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े पुराने मामले में बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। यह मामला चुनाव के दौरान कथित तौर पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा था।
इस फैसले को हेमंत सोरेन के लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में, जब वे पहले से कई राजनीतिक और कानूनी विवादों के बीच सक्रिय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं।
किस मामले में मिली राहत?
मामला चुनाव के दौरान कथित आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा था। आरोप था कि मतदान के दिन हेमंत सोरेन पार्टी के प्रतीक और पहचान से जुड़ी सामग्री पहनकर पोलिंग बूथ पहुंचे थे, जिसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना गया।
इसी आधार पर उनके खिलाफ IPC की धारा 188 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू हुई थी। बाद में इस मामले को लेकर निचली अदालत में कार्यवाही भी आगे बढ़ी, जिसे सोरेन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद हेमंत सोरेन के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि इस मामले में दर्ज की गई कार्रवाई टिकाऊ नहीं है और इसे आगे बढ़ाने का आधार पर्याप्त नहीं बनता।
प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के फैसले के बाद सोरेन को इस मामले में राहत मिल गई है और उनके खिलाफ इस FIR के आधार पर आगे की कार्यवाही का रास्ता बंद हो गया है।
मामला पुराना, लेकिन राहत अभी क्यों अहम है?
यह मामला भले पुराना हो, लेकिन इसका असर मौजूदा राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हेमंत सोरेन पिछले कुछ समय से लगातार कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, इसलिए किसी भी मामले में मिली राहत राजनीतिक संदेश भी देती है।
ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक पुराने केस का अंत नहीं, बल्कि झारखंड की मौजूदा राजनीति में सोरेन की स्थिति को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। खासकर विपक्ष और सत्तारूढ़ खेमे के बीच चल रही तीखी राजनीतिक खींचतान के बीच यह फैसला और भी अहम हो जाता है।
हेमंत सोरेन के लिए राजनीतिक मायने क्या हैं?
झारखंड की राजनीति में हेमंत सोरेन एक केंद्रीय चेहरा हैं और उनके खिलाफ दर्ज हर केस का असर राजनीतिक विमर्श पर पड़ता है। ऐसे में हाईकोर्ट से मिली राहत को उनके समर्थक एक बड़ी कानूनी जीत के तौर पर पेश कर सकते हैं।
दूसरी ओर, विपक्ष के लिए यह मामला अब कमजोर पड़ता दिख सकता है, क्योंकि जिस FIR और कार्यवाही के आधार पर सवाल उठाए जा रहे थे, उसे अदालत ने ही रद्द कर दिया है। इससे सोरेन को सार्वजनिक तौर पर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का मौका मिल सकता है।
कानूनी राहत के साथ राजनीतिक संदेश भी
झारखंड में हेमंत सोरेन के खिलाफ कई मामलों और जांचों को लेकर पहले से सियासी माहौल गर्म रहा है। ऐसे में आचार संहिता उल्लंघन मामले में मिली राहत को सिर्फ तकनीकी कानूनी आदेश के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
यह फैसला सोरेन के लिए राहत भरा इसलिए भी है क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि उनके खिलाफ दर्ज हर मामला अदालत में टिक नहीं रहा। आने वाले समय में उनके समर्थक इस फैसले को राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बना सकते हैं।
अब आगे क्या?
इस फैसले के बाद आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े इस मामले में हेमंत सोरेन को राहत मिल चुकी है, लेकिन झारखंड की राजनीति में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं मानी जाएगी। राज्य की सियासत में सोरेन अब भी सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं और उनके खिलाफ चल रहे अन्य मामलों पर भी नजर बनी रहेगी।
फिलहाल इतना जरूर है कि हाईकोर्ट के इस फैसले ने हेमंत सोरेन को एक ऐसे मामले में राहत दी है, जिसे विपक्षी राजनीति में बार-बार उठाया जा सकता था। अब यह फैसला झारखंड की राजनीति में नई बहस और नए दावों की जमीन तैयार कर सकता है।
